Maharashtra Politics Operation Tiger: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर होने की चर्चा तेज है. शिवसेना (यूबीटी) के भीतर संभावित टूट की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री रह चुके एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाला शिवसेना गुट विपक्षी खेमे के सांसदों और विधायकों को अपने साथ लाने की कोशिशों में जुटा बताया जा रहा है. राजनीतिक गलियारों में इसे अनौपचारिक रूप से ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम दिया जा रहा है.
ठाकरे की बैठक से शुरू हुई अटकलें
घटनाक्रम ने उस समय रफ्तार पकड़ी जब उद्धव ठाकरे ने मुंबई स्थित अपने आवास पर पार्टी सांसदों की बैठक बुलाई. इस बैठक में शिवसेना (यूबीटी) के नौ में से केवल चार सांसद ही पहुंचे. इसके बाद पार्टी के भीतर असंतोष और संभावित बगावत की चर्चाएं तेज हो गईं.
शिंदे गुट के नेताओं का दावा है कि उद्धव ठाकरे के खेमे के छह सांसद अलग समूह बनाने की तैयारी में हैं. सूत्रों के मुताबिक ये सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंप सकते हैं और बाद में शिंदे गुट की लोकसभा इकाई में शामिल हो सकते हैं.
किन सांसदों के नाम चर्चा में?
जिन सांसदों के नाम संभावित बागी खेमे में लिए जा रहे हैं, उनमें परभणी से संजय जाधव, शिर्डी से भाऊसाहेब वाकचौरे, यवतमाल से संजय देशमुख, हिंगोली से नागेश पाटिल अष्टीकर, धाराशिव से ओमराजे निंबालकर और मुंबई नॉर्थ-ईस्ट से संजय पाटिल शामिल बताए जा रहे हैं.
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है. सूत्रों के अनुसार ओमराजे निंबालकर और संजय पाटिल की अंतिम स्थिति मंगलवार देर शाम तक स्पष्ट नहीं थी, लेकिन उनकी शिंदे गुट के नेताओं से बातचीत जारी थी. इसी बीच हिंदुस्तान टाइम्स की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह भी बताया गया कि संजय जाधव, संजय देशमुख और भाऊसाहेब वाकचौरे मंगलवार को नई दिल्ली पहुंचे और पार्टी नेतृत्व की फोन कॉल का जवाब नहीं दिया.
ठाकरे के साथ कौन-कौन?
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार इस समय उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़े सांसदों में मुंबई दक्षिण से अरविंद सावंत, मुंबई दक्षिण मध्य से अनिल देसाई और नासिक से राजाभाऊ वाजे के नाम लिए जा रहे हैं. यदि छह सांसद शिंदे गुट के साथ चले जाते हैं तो यह संख्या शिवसेना (यूबीटी) के लोकसभा दल के दो-तिहाई हिस्से के बराबर होगी. ऐसी स्थिति में वे दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बच सकते हैं.
नुकसान रोकने में जुटे उद्धव ठाकरे
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उद्धव ठाकरे ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को सक्रिय कर दिया है. उन्होंने संजय राउत और अरविंद सावंत को नाराज बताए जा रहे सांसदों से व्यक्तिगत बातचीत करने की जिम्मेदारी सौंपी है. खुद ठाकरे भी उनसे संपर्क साध रहे हैं. इसके अलावा जिन सांसदों ने पार्टी की बैठक में हिस्सा नहीं लिया था, उनके संसदीय क्षेत्रों के संगठन पदाधिकारियों से भी संवाद शुरू किया गया है.
यही नहीं इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, उद्धव गुट ने लोकसभा स्पीकर से मुलाकात करके आधिकारिक पत्र भी दिया है. उन्होंने ओम बिरला से मांग की है कि शिवसेना (यूबीटी) को ही आधिकारिक रूप से राजनीतिक पार्टी के रूप में मान्यता दी जाए.
अरविंद सावंत के लेटर में उद्धव गुट ने कहा कि अगर उनकी पार्टी का कोई गुट अलग मांग करता है, तो कोई भी फैसला लेने से पहले शिवसेना (यूबीटी) को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए. उन्होंने संविधान की 10वीं अनुसूची का भी हवाला दिया, जिसके तहत दल बदल विरोधी कानून लागू होता है. उन्होंने कहा कि पार्टी इसका उपयोग करने का अधिकार रखती है.
दिल्ली में बढ़ी हलचल, राउत ने लगाए गंभीर आरोप
संभावित टूट की खबरों के बीच शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत तथा लोकसभा में पार्टी के नेता अरविंद सावंत मंगलवार को दिल्ली पहुंचे. अब तक के इतिहास से देखें तो, जब-जब शिवसेना पर संकट आता है, संजय राउत पार्टी की तरफ से तीखी बयानबाजी करते हैं. उन्होंने एक बार फिर से वही काम किया है. संजय राउत ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, ‘चौंकाने वाली जानकारी मिली है कि महाराष्ट्र के सांसदों को आज रात 15-15 करोड़ रुपये एडवांस दिए जा रहे हैं. अपना सपना मनी मनी.’
राउत आगे भी बोले
राउत ने इसके बाद अपने बयानों की झड़ी लगा दी. उन्होंने महुआ मोइत्रा की पोस्ट पर रिप्लाई करते हुए दावा किया कि सांसदों को पाले में करने के लिए ‘मिनिमम सपोर्ट प्राइस’ 50 करोड़ है. 15 करोड़ एडवांस में दिए जा रहे हैं. लेकिन ये सभी 50 हजार के लायक भी नहीं हैं. उन्होंने यह भी कहा कि नासिक के सांसद राजाभाऊ वाजे दिल्ली में इंडस्ट्री कमिटी की एक मीटिंग के लिए आए हैं. जबकि मीडिया कुछ और दिखा रहा है.
वहीं हिंगोली के सांसद नागेश के बारे में संजय राउत ने दावा किया कि, उन्होंने कहा कि वह हिंगोली में ही हैं. ये लोग (शिंदे गुट) उनके फर्जी सिग्नेचर कर सकता है. संजय राउत ने धमकी देते हुए कहा कि इस बार शिवसैनिक और जनता इन्हें छोड़ेगी नहीं.
शिंदे भी पहुंचने वाले थे दिल्ली
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एकनाथ शिंदे भी मंगलवार देर रात दिल्ली पहुंचने वाले थे. जब मीडिया ने एकनाथ शिंदे से ऑपरेशन टाइगर को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कोई सीधी टिप्पणी नहीं की. वहीं, शिवसेना सांसद और पार्टी प्रवक्ता नरेश म्हास्के ने कहा, ‘हम किसी को पार्टी में शामिल होने के लिए नहीं कह रहे हैं. लेकिन शिवसेना (यूबीटी) में कई नेता और जनप्रतिनिधि असंतुष्ट हैं. अगर कोई सामान्य शिवसैनिक भी हमारे साथ आना चाहता है तो उसका स्वागत है.’
केवल सांसद या विधायक भी निशाने पर?
शिंदे गुट के एक मंत्री ने दावा किया कि यह अभियान केवल लोकसभा सांसदों तक सीमित नहीं है. उनके मुताबिक शिवसेना (यूबीटी) के कई विधायक भी संपर्क में हैं. उन्होंने कहा, ‘कुछ विधायक लगातार बातचीत में हैं. हमारा लक्ष्य 16 से 17 विधायकों का समर्थन हासिल करना है. यदि ऐसा होता है तो यह बहुत बड़ी राजनीतिक घटना होगी.’ अगर यह प्रयास सफल रहता है तो यह उद्धव ठाकरे के लिए दूसरा बड़ा झटका होगा. इससे पहले 2022 में एकनाथ शिंदे ने शिवसेना में बगावत कर महाविकास अघाड़ी सरकार गिरा दी थी और बाद में भाजपा के साथ मिलकर नई सरकार बनाई थी.
आखिर अभी क्यों हो रही है यह कवायद?
भाजपा और शिंदे गुट के कुछ नेताओं का मानना है कि केंद्र की एनडीए सरकार लोकसभा में भविष्य के महत्वपूर्ण विधेयकों, विशेष रूप से परिसीमन (डिलिमिटेशन) से जुड़े प्रस्तावों को लेकर अपनी संख्या और मजबूत करना चाहती है. अगर उद्धव गुट के सांसद एनडीए के समर्थन में आते हैं, तो इससे एकनाथ शिंदे की गठबंधन में राजनीतिक हैसियत और मजबूत होगी. संभवतः शिंदे की नजर केवल मौजूदा राजनीतिक समीकरणों पर नहीं है. वे 2029 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के साथ सीट बंटवारे में अपनी स्थिति और मजबूत करना चाहते हैं.
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एक साल से चल रही थी तैयारी?
शिवसेना के अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि उद्धव गुट के सांसदों से संपर्क साधने की कोशिशें कोई नई बात नहीं हैं. बताया जाता है कि करीब एक साल पहले ही इस दिशा में काम शुरू हो गया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस जिम्मेदारी का बड़ा हिस्सा शिंदे के बेटे और कल्याण से सांसद श्रीकांत शिंदे तथा केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव को सौंपा गया था.
रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि उद्धव गुट के बागी सांसद दिल्ली में श्रीकांत के घर पर ही ठहरे हुए हैं. एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, कथित तौर पर एकनाथ शिंदे की बुधवार सुबह 8.30 बजे इन सांसदों के साथ मीटिंग भी हुई. इसके बाद ही संभवतः इन सभी की मुलाकात स्पीकर ओम बिरला से होगी. ओम बिरला मंगलवार रात ही दिल्ली लौटे हैं. फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति में सस्पेंस बना हुआ है. जल्द ही यह साफ होगा कि ऑपरेशन टाइगर केवल राजनीतिक चर्चा बनकर रह जाता है या फिर राज्य की राजनीति में एक और बड़े विभाजन की वजह बनता है.
