Lockdown 2 guidelines : घर से बाहर निकले तो मास्क लगाना जरूरी, थूका तो होगी ये सजा

Lockdown2 guidelines by home ministy : कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में सरकार ने लॉकडाउन-2 के लिए नये दिशा निर्देश जारी कर दिये हैं. इन दिशा निर्देश का पालन करना अनिवार्य होगा, साथ ही जो इनका उल्लंघन करेगा उनके खिलाफ कार्रवाई होगी, जिसमें सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है. सरकार ने कई सेवाओं को लॉकडाउन से छूट दी है और कई पर पाबंदी जारी है.

कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में सरकार ने लॉकडाउन-2 के लिए नये दिशा निर्देश जारी कर दिये हैं. इन दिशा निर्देश का पालन करना अनिवार्य होगा, साथ ही जो इनका उल्लंघन करेगा उनके खिलाफ कार्रवाई होगी, जिसमें सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है. सरकार ने कई सेवाओं को लॉकडाउन से छूट दी है और कई पर पाबंदी जारी है.

सरकार ने कई सेवाओं में छूट तो दी है और लेकिन उसके लिए कई शर्तों का पालन करना होगा. जिसमें मास्क लगाना जरूरी होगा, साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना भी आवश्यक होगा. गृह मंत्रालय ने जो गाइडलाइन जारी की है, उसके अनुसार घर से बाहर निकलने पर मास्क लगाना जरूरी होगा. मास्क बाजार का बना हो यह कोई जरूरी नहीं है. मंत्रालय ने कहा है कि अगर किसी के पास मास्क नहीं है तो वे गमछा या दुपट्टे का प्रयोग भी कर सकते हैं, लेकिन सरकार ने मास्क को जरूरी बताया है. इस निर्देश का पालन नहीं करने पर सरकार कार्रवाई कर सकती है.

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इसके अलावा सरकार ने सोशल डिस्टेंसिंग को भी जरूरी बताया है. जब आप सामान खरीदने जायें तो इसका पालन करें. सरकार ने सड़क थूकने वालों के लिए खास निर्देश जारी किया है. इसके अनुसार सड़क पर थूकने वालों पर जुर्माना लगाया जायेगा.

गौरतलब है कि कोरोना वायरस का संक्रमण थूक से बड़े पैमाने पर फैलता है. यही कारण है कि सरकार ने थूकने पर पाबंदी लगायी है. विदेशों में तो पहले से ही थूकने पर जुर्माने का प्रावधान हैं.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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