Land Reform: भूमि सुधार पर देश के विशेषज्ञ करेंगे मंथन

भूमि सुधार संबंधी पहल को आगे बढ़ाने के लिए भारत सरकार का भूमि संसाधन विभाग (डीओएलआर) शुक्रवार से दो दिवसीय राष्ट्रीय 'चिंतन शिविर' आयोजित कर रहा है. यह कार्यशाला राजस्व न्यायालय प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक मंच पर लाने का काम करेगी.

Land Reform: देश में भूमि संबंधी विवाद के सबसे अधिक मामले लंबित हैं. भूमि संबंधी विवाद को कम करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से राजस्व न्यायालय मामला प्रबंधन प्रणाली का आधुनिकीकरण किया जा रहा है. साथ ही भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण भी किया जा रहा है. भूमि सुधार के लिए उठाए गए कदमों का जमीनी स्तर पर सकारात्मक प्रभाव दिख रहा है. भूमि सुधार संबंधी पहल को आगे बढ़ाने के लिए भारत सरकार का भूमि संसाधन विभाग (डीओएलआर) शुक्रवार से दो दिवसीय राष्ट्रीय ‘चिंतन शिविर’ आयोजित कर रहा है. यह कार्यशाला राजस्व न्यायालय प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक मंच पर लाने का काम करेगी. 


राजस्व न्यायालयों को बढ़ते मुकदमों, प्रक्रिया संबंधी देरी और जटिल प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ रहा है. इसके कारण आम लोगों की आजीविका, संपत्ति अधिकार और निवेश पर सीधा असर पड़ रहा है. इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए पुराने भूमि अभिलेख को डिजिटल करने का काम लगभग पूरा होने वाला है. भूमि रिकॉर्ड के डिजिटल होने से अदालतों में भूमि संबंधी विवाद की संख्या में कमी आने के साथ भूमि खरीद की प्रक्रिया पारदर्शी होगी. 

भूमि संबंधी विवाद को कम करने पर होगा मंथन

राष्ट्रीय कार्यशाला में राजस्व न्यायालय मामला प्रबंधन प्रणाली (आरसीसीएमएस) के आधुनिकीकरण पर मंथन होगा ताकि भूमि संबंधी विवाद के शीघ्र, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित समाधान हो सके. साथ ही भूमि सुधार के लिए राज्य-स्तरीय इनोवेशन और प्रौद्योगिकी की सर्वोत्तम प्रणालियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर होगा. इस दौरान नागरिकों के लिए भाषायी बाधाओं को दूर करने के लिए भूमि अभिलेखों की बहुभाषी पहुंच को सुगम बनाने पर चर्चा होगी. 


कार्यशाला भूमि संसाधन विभाग द्वारा पहले से ही चल रही प्रमुख पहलों पर आधारित होगी, जैसे राजस्व न्यायालय प्रक्रियाओं का सरलीकरण, अधिकारों के अभिलेख प्रारूप का मानकीकरण, राजस्व शब्दावली की एकीकृत शब्दावली का निर्माण करने पर चर्चा होगी ताकि सभी 22 अनुसूचित भाषाओं में भूमि अभिलेखों को सुलभ बनाने में मदद मिल सके. सरकार का मानना है कि देश के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए भूमि सुधार होना बेहद जरूरी है.  

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By Vinay Tiwari

Vinay Tiwari is a contributor at Prabhat Khabar.

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