संसद का मानसून सत्र खत्म, किरेन रिजिजू ने कहा-लोकसभा में 19% और राज्यसभा में 39% हुआ काम

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मानसून सत्र के दौरान संसद की कार्यवाही बाधित होने पर विपक्ष को आड़े हाथों लिया है. उन्होंने कहा कि सरकार चर्चा चाहती थी, पर विपक्ष सदन से भागता रहा, जिससे सत्र का अधिकांश समय बर्बाद हुआ.

किरेन रिजिजू ने कहा कि मानसून सत्र में कुल 12 विधेयक पारित हुए, लेकिन दुख की बात यह रही कि लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में केवल एक विधेयक पर चर्चा हो सकी. संसद का अधिकांश समय बर्बाद हुआ, लोकसभा में 19 प्रतिशत और राज्यसभा में 39 प्रतिशत काम हुआ.


लोकसभा में महज 19 प्रतिशत कार्य हुआ

किरेन रिजिजू ने कहा कि मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में महज 19 प्रतिशत कार्य हुआ, जबकि राज्यसभा में 39 प्रतिशत काम हुआ. संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि सरकार संसद में चर्चा के स्तर से खुश नहीं है. उन्होंने कांग्रेस पर अनुचित तरीके से सदन की कार्यवाही बाधित करने का भी आरोप लगाया.

संसदीय व्यवस्था के लिए विपक्ष का रुख गलत

किरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस ने संसदीय व्यवस्था को बर्बाद करने की कोशिश की है. संसदीय व्यवस्था में संसद का चलना बहुत जरूरी है. संसद चलेगा तभी बहस होगी और देश हित में निर्णय लिए जा सकेंगे. कांग्रेस ने इस व्यवस्था को खराब किया है. वे यह समझने लगे हैं कि उनका काम सिर्फ नारेबाजी करना है. इसी वजह से वे बहस से भाग रहे हैं. उनके हंगामे से सदन का समय खराब हुआ.

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By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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