महिंद्रा ग्रुप का कायापलट करने वाले पूर्व चेयरमैन और देश के सबसे वृद्ध अरबपति केशव महिंद्रा का निधन

केशव महिंद्रा ने अपने 48 साल के करियर में महिंद्रा ग्रुप को आॅटोमोबाइल से बढ़ाकर आईटी, रियल स्टेट और हाॅस्पिटिलिटी तक लेकर गये. उनके रिटायरमेंट के बाद उनके भतीजे आनंद महिंद्रा उनके पद को संभाल रहे हैं.

महिंद्रा एंड महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा के चाचा केशव महिंद्रा का आज 99 साल की उम्र में निधन हो गया. वे महिंद्रा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन थे और अभी उनकी गिनती देश के सबसे वृद्ध अरबपतियों में होती थी. केशव महिंद्रा 1962 से 2012 तक महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन रहे थे.

फोर्ब्स ने बताया था सबसे अमीर अरबपति

गौरतलब है कि फोर्ब्स ने हाल ही में उन्हें देश का सबसे अमीर उद्योगपति घोषित किया था, जिनका नेटवर्थ 1.2 बिलियन डालर था. केशव महिंद्रा ने अपने 48 साल के करियर में महिंद्रा ग्रुप को आॅटोमोबाइल से बढ़ाकर आईटी, रियल स्टेट और हाॅस्पिटिलिटी तक लेकर गये. उनके रिटायरमेंट के बाद उनके भतीजे आनंद महिंद्रा उनके पद को संभाल रहे हैं.


महिंद्रा ग्रुप को दिया था विस्तार

केशव महिंद्रा ने कंपनी को काफी विस्तार दिया और उन्होंने विलीज कॉर्पोरेशन, मित्सुबिशी, इंटरनेशनल हार्वेस्टर, यूनाइटेड टेक्निकल जैसी वैश्विक बड़ी कंपनियों के साथ व्यापारिक गठजोड़ किया. एक जीप कंपनी से महिंद्रा ग्रुप को वे काफी आगे लेकर आये.

केशव महिंद्रा का जन्म शिमला में हुआ था

केशव महिंद्रा का जन्म नौ अक्टूबर 1923 में शिमला में हुआ था. उन्होंने अमेरिका के एक विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया था. उन्होंने 1947 में महिंद्रा ग्रुप को ज्वाइन किया था जिसकी स्थापना उनके पिता ने की थी. केशव महिंद्रा ने 2004 से 2010 के बीच प्रधानमंत्री की व्यापार और उद्योग परिषद के सदस्य के रूप में भी काम किया था.

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उद्योग जगत में शोक

बिजनेस जगत के कई दिग्गजों ने केशव महिंद्रा के निधन पर शोक जताते हुए ट्‌वीट किया है. पवन गोयनका ने लिखा उद्योग जगत ने आज अपने बड़े लीडर को खो दिया है जिसकी भरपाई संभव नहीं. मैं जितने भी लोगों से मिला उनमें वे बेहतरीन इंसान थे. गौतम सिंघानिया ने ट्‌वीट किया-केशव महिंद्रा ने एक बेहतरीन जिंदगी जीया और महिंद्रा ग्रुप को बढ़ाने में उनकी अहम भूमिका है. मैं उनके निधन पर अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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