केरल में एक बार फिर भारी बारिश ने तबाही मचा दी है. 1 अगस्त को केरल के कई इलाकों में लैंडस्लाइड, मलबा खिसकने और बाढ़ की घटनाओं में कम से कम 6 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोगों के लापता होने की आशंका है. वहीं कन्नूर बाढ़ प्रभावित चेंगलाई इलाके में भारी बारिश के बाद, कई निचले इलाके जलमग्न हो गए हैं और सड़कों व आसपास के इलाकों में पानी बह रहा है. हालात को देखते हुए राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है.
IMD इन जिलों में रेड अलर्ट जारी
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने केरल के इडुक्की, कोट्टायम, पथानमथिट्टा, त्रिशूर, मलप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड समेत कई जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है. विभाग ने बेहद भारी बारिश, आंधी और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी है.
वायनाड की 2024 की भीषण त्रासदी के बाद भी केरल में लैंडस्लाइड का खतरा कम नहीं हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि संवेदनशील इलाकों में वैज्ञानिक योजना, निर्माण पर सख्त नियंत्रण, वनों का संरक्षण और समय रहते चेतावनी प्रणाली को मजबूत किए बिना हर मानसून में ऐसी घटनाएं दोहराने का खतरा बना रहेगा.
आखिर क्यों हो रहे हैं बार-बार लैंडस्लाइड ?
मौसम विभाग के वैज्ञानिकों अनुसार, इस बार सिर्फ एक दिन की बारिश नहीं, बल्कि पिछले कई दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण मिट्टी पूरी तरह पानी से भर चुकी थी. इसके बाद अचानक हुई तेज बारिश ने पहाड़ी ढलानों को कमजोर कर दिया और कई स्थानों पर लैंडस्लाइड हो गया.
पश्चिमी घाट की बनावट भी वजह
केरल का पश्चिमी घाट पहले से ही लैंडस्लाइड के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है. यहां कठोर चट्टानों के ऊपर ढीली मिट्टी की परत होती है. लगातार बारिश का पानी मिट्टी से होकर चट्टानों तक पहुंचता है, जिससे दोनों परतों के बीच पकड़ कमजोर पड़ जाती है और पूरी ढलान नीचे खिसक जाती है.
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