Middle East War: ईरान युद्ध के बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका दिया है. स्टार्मर ने साफ कर दिया है कि यह जंग उनका नहीं है और इसमें वे नहीं उलझेंगे. ब्रिटेन का मकसद खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम करना और होर्मुज स्ट्रेट को आवाजाही के लिए सुरक्षित करना है. उन्होंने कूटनीतिक प्रयासों पर जोर देते हुए कहा कि इस लक्ष्य के लिए हरसंभव कूटनीतिक रास्ता अपनाया जाएगा.
होर्मुज सुरक्षित पार करना सबसे बड़ी चुनौती : स्टार्मर
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री स्टार्मर ने आगे कहा कि सबसे बड़ी चुनौती स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित आवाजाही तय करना है. उन्होंने कहा- चुनौती बीमा की नहीं, बल्कि आवागमन के सुरक्षा की है. हमें एकजुट होकर काम करना होगा. एक स्पष्ट और शांत नेतृत्व की जरूरत है, इसके लिए ब्रिटेन तैयार है. इस हफ्ते ब्रिटेन में 50 देशों के साथ कीर स्टार्मर बैठक कर सकते हैं.
होर्मुज खुलवाने के लिए 35 देशों को एकजुट करेंगे स्टार्मर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाने के लिए ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर 35 देशों के साथ बैठक करेंगे. बुधवार को ब्रिटिश पीएम ने कहा कि 35 देशों ने इस तेल मार्ग की सुरक्षा बहाल करने के लिए एक बयान पर हस्ताक्षर किए है. उन्होंने कहा कि स्थिरता लाने के लिए सैन्य और कूटनीति का साथ जरूरी है.
अमेरिका की नाराजगी के बीच ब्रिटेन बुला रहा बैठक
ब्रिटिश पीएम 35 देशों के साथ ऐसे समय में बैठक करने जा रहे हैं, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ब्रिटेन समेत कई अन्य मित्र देशों के प्रति नाराजगी जता चुके हैं. ट्रंप हर दिन सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं. मंगलवार को ट्रंप ने यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस को कड़ा संदेश दिया था. ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा- होर्मुज की वजह से जेट ईंधन न मिलने वाले सभी देशों, जैसे कि यूनाइटेड किंगडम, जिसने ईरान के पतन में शामिल होने से इनकार कर दिया, उनके लिए मेरा एक सुझाव है- पहला अमेरिका से तेल खरीदें और दूसरा कुछ हिम्मत जुटाएं, होर्मुज पर जाएं और उसे अपने कब्जे में ले लें.
क्यों जरूरी है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में एक है. यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है. इसी रास्ते से दुनिया के बड़े हिस्से तक कच्चा तेल और गैस पहुंचता है. सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत और कतर जैसे बड़े तेल और गैस उत्पादक देश इसी मार्ग पर निर्भर हैं. अगर यह रास्ता बंद हो जाता है, तो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति बाधित हो सकती है. अभी ऐसा ही संकट आया हुआ है. इस रूट के बंद होने के कारण कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. इसका सीधा असर दुनिया की अर्थव्यवस्था, व्यापार, परिवहन और आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है.
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