Love Jihad : कर्नाटक में नेहा की हत्या के विरोध में बीजेपी 22 अप्रैल को करेगी राज्यव्यापी प्रदर्शन, जानें फैयाज ने क्यों की हत्या

Love Jihad : कर्नाटक के हुबली में एमसीए की छात्रा नेहा हिरमेठ की हत्या फैयाज खोंडुनाईक ने कर दी .

Love Jihad : कर्नाटक में कांग्रेस नेता की बेटी नेहा हिरेमठ की हत्या के विरोध में 22 अप्रैल को बीजेपी राज्यव्यापी प्रदर्शन करेगी. बीजेपी नेता विजयेंद्र येदियुरप्पा ने एक्स पर पोस्ट कर इस बारे में जानकारी दी और कर्नाटक की कांग्रेस सरकार को आड़े हाथों लिया. अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि कर्नाटक में अब महिलाएं सुरक्षित नहीं. विधानसभा के अंदर पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगे हैं. रामेश्वरम कैफे में विस्फोट हुआ. आम आदमी जय श्रीराम का नारा नहीं लगा सकता. राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति बहुत ही खराब है.

नेहा की हत्या फैयाज ने की

गौरतलब है कि 18 अप्रैल को एमसीए की छात्रा नेहा हिरेमठ की हत्या फैयाज खोंडुनाईक ने काॅलेज परिसर में ही चाकू मारकर कर दी थी. आरोपी को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया है. सीसीटीवी फुटेज में फैयाज नेहा पर चाकू से बार-बार हमला करता दिख रहा है. घटना के सामने आने के बाद कर्नाटक में खराब कानून व्यवस्था का मुद्दा तूल पकड़ा. लेकिन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इसे उनका आपसी मामला बताया है. वहीं बीजेपी पूरे मामले को लव जिहाद बता रही है. नेहा के पिता निरंजन हिरमेठ ने भी इसे लव जिहाद ही बताया है.

फैयाज एकतरफा प्यार में था

पुलिस ने घटना की जांच के दौरान जो जानकारी प्राप्त की है, उसके अनुसार नेहा शाम को काॅलेज कैंपस से बाहर जा रही थी, उसी वक्त फैयाज उसके सामने आया. उसने पहले नेहा से बात की और फिर उसे चाकू मारा. नेहा जब चाकू के वार से जमीन पर गिर गई तो उसने छह से सात बार उसके शरीर पर चाकू से वार किया. उसके बाद वह वहां से भागने लगा. लेकिन काॅलेज के लड़कों ने उसे पकड़ा. नेहा को घायलावस्था में अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उसकी तबतक मौत होई. फैयाज का कहना है कि वो और नेहा रिलेशनशिप में थे, लेकिन पिछले कुछ समय से वो उससे दूर हो रही थी, इसलिए उसने इस घटना को अंजाम दिया. वहीं नेहा के पिता निरंजन का कहना है कि उनकी बेटी ने फैयाज का विवाह प्रस्ताव ठुकरा दिया, जिसकी वजह से फैयाज ने उसके साथ यह सबकुछ किया. यह पूरी तरह लव जिहाद का मामला है. फैयाज पूरी तरह एकतरफा प्यार में था. उन्होंने यह भी कहा कि जब फैयाज ने विवाह का प्रस्ताव दिया, तो हमने उससे बात की थी और यह बता दिया था कि हम शादी की इजाजत नहीं दे सकते क्योंकि वह मुसलमान है और हम हिंदू.

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Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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