Poonch Attack: कारगिल युद्ध के हीरो का बेटा था यह शहीद जवान, मां से किया था ये वादा

लांस नायक कुलवंत सिंह के पिता बलदेव सिंह ने भी देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए थे. कारगिल युद्ध में कुलवंत सिंह के पिता ने अपना पराक्रम दिखाया था और शहीद हुए थे. उनके शहादत के ठीक 11 साल बाद कुलवंत सिंह 2010 में भारतीय सेना में शामिल हुए थे.

जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में गुरुवार को आतंकवादियों ने सेना के ट्रक पर हमला कर दिया, जिसमें पांच जवान शहीद हो गये. शहीद जवानों को आज आखिरी विदाई दी गयी. आतंकी हमले में शहीद हुए पांच जवानों में से लांस नायक कुलवंत सिंह को अपने पिता की ही तरह देश की रक्षा करते हुए शहादत मिली.

शहीद जवान कुलवंत सिंह के पिता थे कारगिल युद्ध के हीरो

लांस नायक कुलवंत सिंह के पिता बलदेव सिंह ने भी देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए थे. कारगिल युद्ध में कुलवंत सिंह के पिता ने अपना पराक्रम दिखाया था और शहीद हुए थे. उनके शहादत के ठीक 11 साल बाद कुलवंत सिंह 2010 में भारतीय सेना में शामिल हुए थे.

लांस नायक कुलवंत सिंह ने मां से किया था यह वादा

पुंछ आतंकी हमले में लांस नायक कुलवंत सिंह की शहादत की खबर जब उनकी मां को मिली, तो 24 साल पहले का जख्म एक बार फिर से हरा हो गया. कुलवंत की मां ने बताया, जब उनका बेटा घर से निकला था, तो उसने कहा था कि उसे कुछ नहीं होगा और वह सबकुछ ठीक कर देगा. कुलवंत की मां ने 24 साल पहले अपने पति को खोया और अब अपने बेटे का.

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लांस नायक कुलवंत सिंह ने आखिरी बार पत्नी से फोन पर की थी ये बात

पुंछ आतंकी हमले में शहीद हुए लांस नायक कुलवंत सिंह मोगा के चाडिक गांव के रहने वाले थे. उनकी पत्नी ने बताया, कुलवंत सिंह ने उन्हें आखिरी बार फोन किया था और कहा था, बेटे को समय-समय पर वैक्सीनेशन करवाते रहना. शहादत को याद कर कुलवंत सिंह की पत्नी के आंसू नहीं थम रहे थे. मालूम हो कुलवंत सिंह की डेढ़ साल की बेटी और चार साल का बेटा है.

पुंछ आतंकी हमले में पांच जवान शहीद

गौरतलब है कि गुरुवार को पुंछ जिले में आतंकवादियों ने सेना के एक ट्रक पर हमला कर दिया था. जिसमें सवार पांच जवान शहीद हो गये. आतंकवादियों ने कथित रूप से ट्रक पर ग्रेनेड से हमला किया था, जिससे ट्रक में आग लग गयी.

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Published by: Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

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शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

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लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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