मध्य प्रदेश कैबिनेट विस्तार में दिखा ज्योतिरादित्य सिंधिया का दबदबा !

मध्य प्रदेश में 28 मंत्रियों ने शपथ ले ली है. जहां लोकसभा चुनाव 2024 को ध्यान में रखते हुए जातीय समीकरण साधने का प्रयास बीजेपी के द्वारा किया गया है. वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया का दबदबा कायम नजर आ रहा है.

मध्य प्रदेश के कैबिनेट विस्तार के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया की चर्चा तेज हो चली है. दरअसल, कांग्रेस का दामन छोड़कर बीजेपी में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया का दबदबा कैबिनेट विस्तार में नजर आया. वजह पर नजर डालें तो, सिंधिया के करीबी ऐदल सिंह कंसाना, गोविंद राजपूत, प्रद्युम्न सिंह तोमर और तुलसीराम सिलावट को कैबिनेट में जगह दी गई है. इन्होंने मार्च 2020 में कांग्रेस छोड़कर सिंधिया के साथ बीजेपी का दामन थामा था और लगातार अपने क्षेत्र में मेहनत कर रहे थे. इनमें से तुलसीराम सिलावट जो हैं वो सिंधिया के बेहद करीबी हैं. प्रद्युम्न सिंह तोमर और तुलसी सिलावट पिछली शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली सरकार में भी मंत्री के पद पर काबिज थे.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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