उमर खालिद की किताब पर चर्चा: जेएनयू ने लगाया ब्रेक, JNUSU ने बताया तानाशाही

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) प्रशासन ने पूर्व छात्र उमर खालिद की लिखी किताब पर आयोजित होने वाली परिचर्चा के लिए दी गई अनुमति को रद्द कर दिया है. जेएनयू प्रशासन ने इसके पीछे कार्यक्रम के बारे में पूरी जानकारी न देने का हवाला दिया है. इस फैसले का जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) ने विरोध किया है. छात्र संघ ने इसे मनमाना और तानाशाहीपूर्ण करार दिया है.

अंतरराष्ट्रीय आदिवासी अधिकार दिवस के अवसर पर जेएनयू छात्र संघ द्वारा इस परिचर्चा का आयोजन स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज-1 (एसएसएस-1) के सभागार में किया जाना था. यह कार्यक्रम उमर खालिदकी पुस्तक 'फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज: आदिवासी हिस्ट्री एंड द पॉलिटिक्स ऑफ पावर' पर आधारित था. आयोजकों के अनुसार, इस किताब में आदिवासी इतिहास, उनके प्रतिरोध और 'जल, जंगल और जमीन' के संघर्षों पर विस्तार से चर्चा की गई है.

प्रशासन का तर्क: आधी-अधूरी जानकारी के कारण रद्द हुई बुकिंग

विश्वविद्यालय प्रशासन ने 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर जारी एक बयान में कहा कि सभागार की बुकिंग इसलिए रद्द की गई क्योंकि कार्यक्रम के संबंध में पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई थी. प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जेएनयू एक लोकतांत्रिक और विकेंद्रीकृत संस्थान है. यह अनुमति स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के डीन द्वारा दी गई थी और उन्हीं के स्तर से इसे रद्द करने की कार्रवाई भी की गई है.

छात्र संघ का आरोप: अकादमिक स्वतंत्रता दबाने की कोशिश

जेएनयू छात्र संघ ने प्रशासन के इस कदम की तीखी आलोचना की है. छात्र संघ का कहना है कि प्रशासन अकादमिक चर्चाओं और असहमति की आवाजों को दबाने का प्रयास कर रहा है. छात्र संघ ने दावा किया कि डीन ने स्वयं उसी प्रारूप में आवेदन जमा करने का निर्देश दिया था, जिस पर बाद में आपत्ति जताई गई.

छात्र संघ ने कार्यक्रम किसी वैकल्पिक स्थान पर आयोजित करने का लिया फैसला

छात्र संघ ने प्रशासन पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाया और कहा, एक तरफ परिसर में इस्कॉन जैसे संगठनों के कार्यक्रमों के लिए जगह और सहयोग दिया जाता है, वहीं दूसरी तरफ एक अकादमिक पुस्तक पर चर्चा की अनुमति वापस ले ली जाती है. छात्र संघ ने स्पष्ट किया है कि किसी किताब पर चर्चा करना अकादमिक संस्कृति और लोकतांत्रिक संवाद का अभिन्न हिस्सा है और यह कार्यक्रम किसी वैकल्पिक स्थान पर आयोजित किया जाएगा.

फिलहाल जेल में बंद हैं उमर खालिद

पूर्व छात्र उमर खालिद 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामले की कथित साजिश के आरोप में फिलहाल जेल में बंद हैं. प्रस्तावित कार्यक्रम के पोस्टर के मुताबिक इसमें प्रोफेसर प्रभु महापात्र, उमा चक्रवर्ती, शुद्धब्रत सेनगुप्ता और सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर व बानोज्योत्सना वक्ता के रूप में शामिल होने वाले थे.


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लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

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लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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