Jagdeep Dhankhar: धनखड़ के वे बयान जिसने सबको हिलाकर रख दिया, जज, न्यायपालिका, ट्रंप यहां तक सरकार पर भी बरसे

Jagdeep Dhankhar: जगदीप धनखड़ ने सोमवार को उपराष्ट्रपति पद से अचानक इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया. उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया. धनखड़ अपने मुखर व्यक्तित्व के लिए जाने जाते हैं. अपने छोटे कार्यकाल के दौरान उन्होंने न्यायालय, जज, डोनाल्ड ट्रंप, यहां तक कि सरकार पर टिप्पणी करने से पीछे नहीं रहे. खुलकर अपनी बात रखी. उनके कई बयान बेहद चर्चा में रहे. खास कर किसान मुद्दे और न्यायालय पर उन्होंने जो बयान दिया, उसे हमेशा याद रखा जाएगा.

Jagdeep Dhankhar: जगदीप धनखड़ ने शक्तियों के पृथक्करण के मुद्दे पर न्यायपालिका पर तीखा प्रहार किया था. उपराष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान लगभग हर दिन राज्यसभा में विपक्ष के साथ उनका टकराव होता था. धनखड़ ने अपने कार्यकाल के दौरान न्यायालय पर भी जमकर निशाना साधा. उन्होंने शक्तियों के पृथक्करण के मुद्दे पर मुखर होकर सवाल किया था. उन्होंने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम को रद्द करने पर न्यायालय के फैसले की कड़ी आलोचना की थी. उन्होंने संसद द्वारा सर्वसम्मती से पारित कानून को रद्द करने पर सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठाया था.

किसानों के मुद्दे पर सरकार पर बरसे

किसान परिवार से आने वाले जगदीप धनखड़ ने एक मौके पर किसानों के मुद्दे पर मोदी सरकार से सवाल पूछे थे. दिसंबर 2024 में मुंबई में आईसीएआर-सीआईआरसीओटी के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित एक समारोह में बोलते हुए धनखड़ ने कहा था, “कृषि मंत्री जी, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि कृपया मुझे बताएं कि किसान से क्या वादा किया गया था? वादा पूरा क्यों नहीं किया गया? वादा पूरा करने के लिए हमें क्या करना चाहिए?” उन्होंने कहा, “पिछले साल भी एक आंदोलन हुआ था, इस साल भी एक आंदोलन हुआ है.” धनखड़ ने कहा, “समय का पहिया घूम रहा है, हम कुछ नहीं कर रहे हैं. पहली बार मैंने भारत को बदलते देखा है. पहली बार मुझे एहसास हो रहा है कि भारत का विकास हमारा सपना नहीं, बल्कि हमारा लक्ष्य है. भारत दुनिया में इतनी ऊंचाई पर कभी नहीं था” धनखड़ ने किसानों से बात करते हुए कहा था, “जब ऐसा हो रहा है, तो मेरा किसान क्यों परेशान और पीड़ित है? किसान ही असहाय है.”

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ट्रंप को भी धनखड़ ने दिया था करारा जवाब

जगदीप धनखड़ ने इस्तीफ देने से ठीक दो दिन पहले शनिवार को इशारों-इशारों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को करारा जवाब दिया था. धनखंड ने कहा था, “लोगों को किसी आख्यान से प्रभावित नहीं होना चाहिए क्योंकि दुनिया की कोई भी ताकत भारत को यह निर्देश नहीं दे सकती कि उसे अपने मामलों को कैसे संभालना है.” उन्होंने आगे कहा, “भारत आपसी सहयोग से काम करता है, परस्पर सम्मान रखता है और अन्य देशों के साथ कूटनीतिक संवाद करता है. लेकिन हम संप्रभु हैं, हम अपने फैसले खुद लेते हैं.’’ धनखड़ की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब विपक्ष अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया भारत-पाकिस्तान झड़प में ‘संघर्ष विराम’ कराने के दावे पर सरकार से स्पष्टीकरण की मांग कर रहा है.

जज पर भी बोले थे धनखड़

जगदीप धनखड़ ने जजों पर भी कड़ी टिप्पणी की थी. उन्होंने ने कहा था, “हमारे पास ऐसे न्यायाधीश हैं जो कानून बनाएंगे, जो कार्यपालिका के कार्य करेंगे, जो सुपर संसद के रूप में कार्य करेंगे और उनकी कोई जवाबदेही नहीं होगी, क्योंकि देश का कानून उन पर लागू नहीं होता है.”

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अनुच्छेद 142 को धनखड़ ने बताया था परमाणु मिसाइल

धनखड़ ने अनुच्छेद 142 की चर्चा करते हुए कहा था, “अनुच्छेद 142 लोकतांत्रिक ताकतों के खिलाफ एक परमाणु मिसाइल बन गया है और कोर्ट के लिए चौबीसों घंटे उपलब्ध है.” संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को अपने समक्ष किसी भी मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने हेतु आदेश जारी करने की शक्ति देता है. इस शक्ति को सुप्रीम कोर्ट की पूर्ण शक्ति के रूप में भी जाना जाता है. धनखड़ ने कहा था, “हाल ही में एक फैसले में राष्ट्रपति को निर्देश दिया गया है. हम किस दिशा में जा रहे हैं?देश में क्या हो रहा है? हमें बेहद संवेदनशील होना चाहिए. यह सवाल नहीं है कि कोई पुनर्विचार याचिका दायर करता है या नहीं. हमने इस दिन के लिए लोकतंत्र की कभी उम्मीद नहीं की थी. राष्ट्रपति को समयबद्ध तरीके से निर्णय लेने के लिए कहा जाता है और यदि ऐसा नहीं होता है, तो यह कानून बन जाता है.” धनखड़ ने कहा था, “हम ऐसी स्थिति नहीं बना सकते जहां आप भारत के राष्ट्रपति को निर्देश दें और वह भी किस आधार पर?

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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