ISRO: स्पेस अनडॉकिंग की सफलता से चंद्रयान मिशन का रास्ता साफ

इसरो ने स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट (स्पैंडेक्स ) की सफल अनडॉकिंग करने में सफलता हासिल की है. इससे पहले जनवरी 2025 में दो सैटेलाइट की डॉकिंग करने में कामयाबी हासिल की थी. इसरो का कहना है कि इस सफलता के बाद चंद्रयान मिशन और अन्य भावी मिशन का रास्ता साफ होगा.

ISRO: स्पेस क्षेत्र में भारत लगातार नये मुकाम हासिल कर रहा है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक नयी उपलब्धि हासिल की है. इसरो ने स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट (स्पैंडेक्स ) की सफल अनडॉकिंग करने में सफलता हासिल की है. इससे पहले जनवरी 2025 में दो सैटेलाइट की डॉकिंग करने में कामयाबी हासिल की थी. अब इसरो को सैटेलाइट को अनडॉकिंग करने में सफलता मिली है. संस्था ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया है. इसरो का कहना है कि इस सफलता के बाद चंद्रयान मिशन और अन्य भावी मिशन का रास्ता साफ होगा. 


इस सफलता के बाद चांद पर खोज, मानव अंतरिक्ष उड़ान और देश का खुद का अंतरिक्ष स्टेशन बनाने में काफी मदद मिलेगी. अनडॉकिंग के तहत कैप्चर लीवर 3 को योजना के अनुसार रिलीज किया गया. केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री(स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक पोस्ट में सैटेलाइट के सफल डी-डॉकिंग की सराहना करते हुए कहा कि स्पैंडेक्स सैटेलाइट ने डी-डॉकिंग पूरा करने का काम किया है. इससे भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन, चंद्रयान 4 और गगनयान सहित भविष्य के महत्वाकांक्षी मिशनों के सुचारू संचालन का रास्ता साफ होगा. इस उपलब्धि के लिए इसरो की टीम बधाई की पात्र है और यह सभी भारतीयों के लिए गर्व की बात है.  


कैसे हासिल की उपलब्धि


स्पैंडेक्स मिशन पिछले साल 30 दिसंबर को शुरू किया गया था. इसके लिए इसरो ने स्पेस में डॉकिंग के लिए दो सैटेलाइट एसडीएक्स01 और एसडीएक्स02 को कक्षा में स्थापित किया. फिर कई प्रयास के बाद इसरो ने 16 जनवरी को दोनों सैटेलाइट को सफलतापूर्वक स्थापित किया. इसरो के मुताबिक स्पैंडेक्स मिशन दो छोटे अंतरिक्ष यान का उपयोग कर अंतरिक्ष में डॉकिंग के लिए एक सस्ती तकनीक है, जिसे पीएसएलवी के जरिये लांच किया गया था. 
स्पेस डॉकिंग की तकनीक हासिल करने वाला भारत दुनिया का चौथा देश बन गया है. मौजूदा समय में अमेरिका, चीन और रूस के पास ही स्पेस डॉकिंग की तकनीक है. गौरतलब है कि इसरो के अध्यक्ष वी नारायणन पूर्व में कह चुके हैं कि अंतरिक्ष डॉकिंग मिशन के साथ आगे के प्रयोग 15 मार्च से शुरू होंगे. 

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