भारत में 2026 में चावल उत्पादन में करीब 1 करोड़ टन की कमी आने का अनुमान है. Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, यह करीब दो दशक में उत्पादन में सबसे बड़ी गिरावट हो सकती है. पिछले साल रिकॉर्ड 15.4 करोड़ टन चावल उत्पादन हुआ था, जबकि इस साल उत्पादन करीब 14.4 करोड़ टन रहने का अनुमान है. यानी उत्पादन में लगभग 6.5% की गिरावट हो सकती है.
बारिश की कमी से धान की फसल पर असर
रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 1 जून से शुरू हुए चार महीने के मानसून सीजन के दौरान अब तक सामान्य से करीब 15% कम बारिश हुई है. कुछ प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी 42% तक पहुंच गई है. कम बारिश का असर धान की फसल की पैदावार पर पड़ने की आशंका है.
देशभर में गर्मी में बोई जाने वाली धान की फसल का रकबा 11 सितंबर तक 4.268 करोड़ हेक्टेयर रहा, जो एक साल पहले की तुलना में करीब 4% कम है. जबकि गर्मी में बोया जाने वाला धान देश के कुल उत्पादन में 80% से ज्यादा हिस्सेदारी रखता है.
किसानों और चावल की कीमत पर क्या असर?
कम उत्पादन की आशंका के बीच घरेलू चावल की कीमतों में बढ़ोतरी शुरू हो गई है. निर्यात कीमतें भी एक साल से ज्यादा समय के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं. रिपोर्ट में राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बीवी कृष्ण राव के हवाले से कहा गया है कि कम बारिश के कारण पैदावार घट सकती है. वहीं, प्रीमियम किस्म के चावल उगाने वाले किसानों को खुले बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना है. इसके चलते सरकारी खरीद के लिए किसानों की बिक्री भी कम हो सकती है.
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सरकारी भंडार से मिल सकती है राहत
हालांकि उत्पादन घटने के बावजूद भारत के पास चावल का बड़ा भंडार मौजूद है. 1 सितंबर तक राज्य भंडार में बिना कुटे धान समेत करीब 5.96 करोड़ टन चावल मौजूद था. यह 1 अक्टूबर के लिए सरकार के 1.03 करोड़ टन के लक्ष्य से काफी ज्यादा है. इस बड़े भंडार के कारण कम उत्पादन के बावजूद भारत के चावल निर्यात पर तत्काल बड़ा असर पड़ने की संभावना कम बताई गई है.
सर्दियों में बोई जाने वाली फसल पर भी नजर
रिपोर्ट के मुताबिक, सर्दियों में बोई जाने वाली धान की फसल पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि जलाशयों में पानी का स्तर सामान्य से कम है. ऐसे में आने वाले महीनों में बारिश और जल उपलब्धता धान उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण रहेगी.
