Jal Jeevan Mission 2.0 : जल जीवन मिशन (JJM) के पहले चरण का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण बस्तियों तक नल का ढांचा खड़ा करना था, लेकिन मिशन 2.0 में इसका केंद्र बिंदु 'सर्विस डिलीवरी' बन चुका है. सरकार ने इस योजना की समय सीमा दिसंबर 2028 तक बढ़ाते हुए स्पष्ट किया है कि अब सफलता केवल नल कनेक्शनों की संख्या से नहीं, बल्कि सेवा की स्थिरता से मापी जाएगी.
गांव के आम परिवारों के लिए इसका सीधा अर्थ है कि उन्हें प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 55 लीटर शुद्ध पानी, तय समय पर और पर्याप्त प्रेशर के साथ मिलना अनिवार्य किया गया है.
नल कनेक्शन से आगे अब पानी की सर्विस की निगरानी कैसे होगी
जल जीवन मिशन के तहत अब पानी के बहाव और शुद्धता को मापने के लिए डिजिटल निगरानी प्रणाली अपनाई जा रही है. जल स्रोतों और वितरण पाइपलाइनों पर सेंसर और फ्लो-मीटर लगाए जा रहे हैं, जिससे आपूर्ति बाधित होते ही सिस्टम को जानकारी मिल सके. विशेष रूप से बारिश के मौसम में जब नदियों और भूजल में सिल्ट और बैक्टीरिया का खतरा बढ़ता है, तब फील्ड टेस्ट किट (FTK) और मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं के माध्यम से पानी के टर्बिडिटी, टीडीएस और क्लोरीनेशन स्तर की नियमित जांच का नियम कड़ा किया गया है.
Sujalam Bharat में गांव की जल व्यवस्था का डिजिटल रिकॉर्ड कैसे बनेगा
'सुजलम भारत' नीति के तहत जल जीवन मिशन की पूरी ग्रामीण परिसंपत्तियों का डिजिटल डेटाबैंक तैयार किया जा रहा है. गांव के ट्यूबवेल, ओवरहेड वॉटर टैंक, वाल्व और मुख्य पाइपलाइनों को जीआईएस (GIS) मैपिंग के जरिए डिजिटल नेटवर्क पर दर्ज किया जा रहा है. इस पारदर्शी व्यवस्था से यह ट्रैक करना आसान होगा कि किस गांव में पाइपलाइन कब बिछी थी, उसका रखरखाव कब हुआ और बारिश या बाढ़ से नेटवर्क के किस हिस्से में फॉल्ट आया है.
पानी नहीं आने या खराब पानी मिलने पर शिकायत और जवाबदेही किसकी होगी
जल जीवन मिशन 2.0 ने जवाबदेही को स्थानीय स्तर पर विकेंद्रीकृत किया है. जलापूर्ति ठप होने या दूषित पानी की समस्या आने पर ग्रामीण अब मिशन के केंद्रीय डैशबोर्ड और टोल-फ्री हेल्पलाइन पर सीधी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. जमीनी संचालन की जिम्मेदारी ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (VWSC) और ग्राम पंचायत को सौंपी गई है. वहीं, पाइपलाइन फटने या मोटर जलने जैसे तकनीकी मामलों को समय पर हल न करने पर संबंधित कार्यदायी एजेंसी और जल निगम के इंजीनियरों के खिलाफ सर्विस लेवल एग्रीमेंट (SLA) के तहत कार्रवाई का प्रावधान है.
ग्राउंड रिएलिटी
जल जीवन मिशन के ऑफिशियल राष्ट्रीय डैशबोर्ड और राज्य जन स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के आंकड़ों के अनुसार, बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड के बारिश प्रभावित इलाकों में जल ढांचे की असल परीक्षा हो रही है. कागजों पर कनेक्शनों के आंकड़े भले ही 100% के करीब दिख रहे हों, लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि मानसून के दौरान आई तकनीकी खराबी, बिजली कटौती और जलस्रोतों में सिल्ट भरने से कई गांवों में जलापूर्ति प्रभावित हुई है.
केंद्रीय मंत्रिमंडल, जल शक्ति मंत्रालय और प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) द्वारा शेयर की गई 'सुजलम भारत' नीति के तहत अब इन कमियों को डिजिटल ट्रैकिंग और सर्विस लेवल एग्रीमेंट (SLA) के जरिए दुरुस्त करने का खाका तैयार किया गया है, ताकि कागजी आंकड़ों और जमीन की हकीकत के अंतर को खत्म किया जा सके.
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