इंडियन आर्मी का बड़ा प्लान, ₹23000 करोड़ से 300 K-9 वज्र तोप खरीदने की तैयारी; चीन-पाकिस्तान सीमा पर होंगे तैनात

Indian Army Tank Procurement: भारतीय सेना अपनी तोपखाना क्षमता को मजबूत करने के लिए 300 से अधिक अतिरिक्त के-9 वज्र स्वचालित हॉवित्जर खरीदने की तैयारी में है. करीब 23,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना से सेना की लंबी दूरी की मारक क्षमता और युद्धक तैयारी में बड़ा इजाफा होगा. इन्हें पाकिस्तान और चीन से लगने वाली सीमा पर तैनात किया जाएगा.

Indian Army Tank Procurement: भारतीय सेना अपनी लंबी दूरी की मारक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. 300 अतिरिक्त के-9 वज्र-टी स्वचालित तोपों (सेल्फ-प्रोपेल्ड आर्टिलरी गन) की खरीद का प्रस्ताव तैयार कर रही है. इस प्रस्तावित सौदे की अनुमानित लागत करीब 23,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है. अगर इस योजना को मंजूरी मिल जाती है, तो यह हाल के दशकों में भारतीय सेना के सबसे बड़े तोपखाना आधुनिकीकरण कार्यक्रमों में से एक होगी.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा सूत्रों ने बताया कि यह प्रस्ताव इसी सप्ताह रक्षा खरीद बोर्ड (डीपीबी) के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जा सकता है. यदि प्रस्ताव को हरी झंडी मिलती है, तो इसका ठेका लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) को मिलने की संभावना है, जो दक्षिण कोरिया की रक्षा कंपनी हनव्हा एयरोस्पेस के साथ तकनीकी साझेदारी में भारत में के-9 वज्र-टी का निर्माण करती है.

500 से अधिक हो जाएगी के-9 वज्र तोपों की संख्या

प्रस्तावित खरीद पूरी होने के बाद भारतीय सेना के लिए ऑर्डर की गई के-9 वज्र तोपों की कुल संख्या 500 से अधिक हो जाएगी. रक्षा योजनाकारों का मानना है कि इससे पाकिस्तान के साथ पश्चिमी सीमा- एलओसी और चीन के साथ- एलएसी, दोनों मोर्चों पर सेना की फायरपावर में मजबूत बढ़ोतरी होगी.

बदलते सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए सेना लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाली प्रणालियों पर विशेष ध्यान दे रही है. हाल के वर्षों में सेना ने ऐसे हथियारों की आवश्यकता को और गंभीरता से महसूस किया है, खासकर उन अभियानों के बाद जिनमें सटीक और तीव्र प्रहार की क्षमता महत्वपूर्ण साबित हुई.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा फोकस

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया सैन्य अभियानों, विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान प्रदर्शित लंबी दूरी की सटीक हमला क्षमता ने सेना को आधुनिक तोपखाना प्रणालियों की आवश्यकता का नया आकलन करने के लिए प्रेरित किया है. सैन्य योजनाकार अब ऐसी मोबाइल और तेज प्रतिक्रिया देने वाली तोप प्रणालियों पर जोर दे रहे हैं, जो विभिन्न प्रकार के युद्धक्षेत्रों और भौगोलिक परिस्थितियों में प्रभावी फायर सपोर्ट उपलब्ध करा सकें.

क्या है के-9 वज्र की खासियत?

के-9 वज्र एक 155 मिमी/52 कैलिबर ट्रैक्ड स्वचालित हॉवित्जर तोप प्रणाली है. यह 40 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लक्ष्य को निशाना बनाने में सक्षम है. इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी “शूट एंड स्कूट” क्षमता है. यानी यह लक्ष्य पर गोले दागने के तुरंत बाद अपनी स्थिति बदल सकती है. इससे दुश्मन की जवाबी तोपखाना कार्रवाई से बचाव आसान हो जाता है. इसके अलावा यह बख्तरबंद सुरक्षा से लैस है और रेगिस्तानी इलाकों के साथ-साथ ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकती है. यही वजह है कि आधुनिक युद्ध रणनीति में इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.

2017 में हुआ था पहला सौदा

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने के-9 वज्र तोपों के लिए पहला बड़ा समझौता वर्ष 2017 में किया था. उस समय 100 तोपों की खरीद के लिए लगभग 4,500 करोड़ रुपये का अनुबंध किया गया था. इन तोपों की आपूर्ति निर्धारित समय से पहले वर्ष 2021 में पूरी कर ली गई थी. इसके बाद इन्हें मुख्य रूप से पाकिस्तान सीमा से लगे रेगिस्तानी क्षेत्रों में तैनात किया गया.

2023 में मिला दूसरा ऑर्डर

के-9 वज्र के प्रदर्शन से संतुष्ट भारतीय सेना ने दिसंबर 2023 में 100 और तोपों की खरीद को मंजूरी दी थी. इस सौदे की कीमत लगभग 7,600 करोड़ रुपये थी. इस निर्णय ने साफ संकेत दिया कि भारतीय सेना इस पर लगातार भरोसा जता रही है और इसे भविष्य की युद्ध रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती है.

लद्दाख में भी सफल रहे परीक्षण

हाल ही में के-9 वज्र के संशोधित शीतकालीन संस्करण का परीक्षण लद्दाख में किया गया था. अत्यधिक ऊंचाई और बेहद कम तापमान वाले क्षेत्रों में हुए इन परीक्षणों में प्रणाली का प्रदर्शन सफल बताया गया. रक्षा अधिकारियों के अनुसार परीक्षण के नतीजों ने उत्तरी मोर्चे पर अतिरिक्त के-9 वज्र इकाइयों की तैनाती की योजना को और मजबूती दी है. चीन से लगती सीमाओं पर ऐसी प्रणालियों की मौजूदगी सेना की युद्धक क्षमता को और मजबूत कर सकती है.

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पाकिस्तान और चीन दोनों मोर्चों पर बढ़ेगी ताकत

रक्षा अधिकारियों का मानना है कि प्रस्तावित खरीद से पाकिस्तान और चीन दोनों दिशाओं में मौजूद सैन्य जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी. साथ ही सेना की लंबी दूरी की सटीक प्रहार क्षमता में भी बड़ा इजाफा होगा. रिपोर्ट के अनुसार, के-9 वज्र-टी की प्रस्तावित खरीद भारतीय सेना के व्यापक तोपखाना आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है. सेना एक साथ कई आधुनिक हथियार प्रणालियों को शामिल कर रही है. 

इनमें एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस), धनुष तोप और अपग्रेडेड पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट सिस्टम जैसी परियोजनाएं शामिल हैं. रक्षा अधिकारियों का मानना है कि इन सभी प्रणालियों के शामिल होने से भारतीय सेना विभिन्न मोर्चों पर तेजी से, सटीक और लगातार फायरपावर उपलब्ध कराने में पहले से कहीं अधिक सक्षम हो जाएगी.

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By Anant narayan shukla

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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