दो दिनों के इस चीन दौरे पर अजीत डोभाल सिर्फ विदेश मंत्री वांग यी से ही नहीं मिलेंगे, बल्कि वे चीन के उप राष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात करेंगे. माना जा रहा है कि इस मुलाकात से दोनों देशों के बीच तनाव कम करने में मदद मिलेगी.
बैठक में किन बातों पर रहेगा जोर?
- तनाव कम करना: भारत और चीन के बीच लद्दाख सीमा पर हुए विवाद के बाद से रिश्तों में जो कड़वाहट आई थी, उसे धीरे-धीरे खत्म करना.
- भरोसा कायम करना: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, अजीत डोभाल ने साफ कहा है कि दोनों देशों के बीच शांति और भरोसा होना बेहद जरूरी है.
- आगे की राह: दोनों देशों का मानना है कि बातचीत से ही सीमा विवाद की समस्या का हल निकाला जा सकता है.
'हम दुश्मन नहीं, विकास के साथी हैं'
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई थी. उस दौरान दोनों नेताओं ने माना था कि भारत और चीन एक-दूसरे के विरोधी या प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं, बल्कि दोनों मिलकर आगे बढ़ने वाले साथी हैं. विदेश मंत्रालय का कहना है कि भारत और चीन में मिलकर दुनिया की 2.8 अरब आबादी रहती है. अगर ये दोनों देश आपस में मिलकर काम करेंगे, तो इससे न सिर्फ दोनों देशों का फायदा होगा, बल्कि पूरे एशिया और दुनिया में शांति बनी रहेगी.
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