India AI Summit: मई 2025 में देर रात 1:05 बजे से लेकर 1:30 बजे के बीच भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों पर महज 25 मिनट में मिसाइल और एयर स्ट्राइक कर बड़ी सफलता हासिल की थी. इस सटीक कार्रवाई ने सेना की रणनीतिक क्षमता और तकनीकी ताकत को पूरी दुनिया में साबित किया था. हालांकि इस ऑपरेशन के दौरान सेना ने यह भी महसूस किया कि पहाड़ी, जंगल और अन्य दुर्गम क्षेत्रों की 3डी मैपिंग को और अधिक सटीक बनाने की जरूरत है. इससे न सिर्फ भविष्य में सैन्य अभियानों की योजना और अधिक प्रभावी ढंग से बनाई जा सकेगी, बल्कि आपात स्थिति में घायल सैनिकों तक तुरंत मदद पहुंचाना भी आसान होगा. खासकर ऐसे इलाकों में, जहां पहुंचना बेहद मुश्किल होता है, वहां प्राथमिक उपचार, दवाइयां और राशन सामग्री समय पर पहुंचाना एक बड़ी चुनौती होती है.
तैयार किया गया एआई-सक्षम ड्रोन सिस्टम
भारतीय सेना की इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए ऑपरेशन सिंदूर के तुरंत बाद इंडियन आर्मी की जालंधर बेस कैंप में एक विशेष एआई-सक्षम ड्रोन सिस्टम तैयार किया गया. यह अत्याधुनिक ड्रोन करीब 9 किलोग्राम तक का सामान लेकर 30 किलोमीटर की दूरी तक उड़ान भर सकता है. यह ड्रोन न केवल युद्ध के दौरान लॉजिस्टिक सपोर्ट को मजबूत करेगा, बल्कि कठिन और संवेदनशील इलाकों में तैनात सैनिकों तक तेजी से सहायता पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभाएगा. यह पहल भारतीय सेना की आधुनिक तकनीक को अपनाने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने की दिशा में बेहद अहम कदम माना जा रहा है.
छात्रों ने बनाया एआई ड्रोन, सेना के मिशन में निभा रहा अहम रोल
इस ड्रोन की सबसे खास बात यह है कि इसे किसी बड़े वैज्ञानिक ने नहीं, बल्कि ग्रेजुएशन कर रहे 20 छात्रों ने तैयार किया है. लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के इन छात्रों ने भारतीय सेना के जालंधर बेस कैंप में करीब डेढ़ महीने तक रहकर इस खास ड्रोन जैसे विमान को विकसित किया. अब इस अत्याधुनिक ड्रोन का इस्तेमाल भारतीय सेना कर रही है. हैरानी की बात यह भी है कि इस उपयोगी ड्रोन को सिर्फ 4.50 लाख रुपये की लागत में तैयार किया गया है, जो इसकी किफायती और स्वदेशी तकनीक को दर्शाता है. इस एआई-सक्षम ड्रोन को दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इंपैक्ट समिट में भी खास तौर पर प्रदर्शित किया गया. कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी के छात्रों और शोधकर्ताओं की ओर से तैयार किए गए 15 आधुनिक एआई प्रोजेक्ट्स दिखाए गए, लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान इसी ड्रोन ने खींचा.
थर्मल कैमरा और 1.2 घंटे की उड़ान क्षमता वाला AI ड्रोन
सूत्रों के मुताबिक इस एआई-सक्षम ड्रोन ने आपदा प्रबंधन, निगरानी, 3डी मैपिंग और जरूरी सामान पहुंचाने जैसे कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इंडिया एआई इंपैक्ट समिट में प्रदर्शित एआई-आधारित वीटीओएल यूएवी प्लेटफॉर्म ‘वीआरआईटीआरए’ को रक्षा विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने भी काफी सराहा है. यह ड्रोन कम समय में तेजी से ऊंचाई हासिल कर सकता है, दूरदराज और दुर्गम इलाकों तक पहुंच सकता है और रियल-टाइम डेटा भेजने में सक्षम है. यही वजह है कि यह सैन्य अभियानों के साथ-साथ आपातकालीन परिस्थितियों में भी बेहद उपयोगी साबित हो रहा है. ड्रोन निर्माण टीम के सदस्य मो. तैयब के अनुसार यह ड्रोन लगातार करीब 1.2 घंटे तक उड़ान भर सकता है. इसमें चार मोटर लगे हैं, जब ड्रोन हवा में उड़ता है तो मोटर बंद हो जाता है. ड्रोन में थर्मल इमेजिंग कैमरा भी लगाया गया है, जो दुश्मन या किसी भी गतिविधि को स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड कर सकता है. इस ड्रोन की एक और खासियत यह है कि इसे उड़ान भरने के लिए रनवे की जरूरत नहीं होती. यही कारण है कि यह बाढ़, भूस्खलन और अन्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों में भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे राहत और बचाव कार्यों को तेज और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलती है.
विश्वविद्यालय के चांसलर ने क्या कहा?
विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ. अशोक मित्तल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का मकसद केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि समानता और सतत विकास भी होना चाहिए. उन्होंने कहा कि ऐसे मंच छात्रों और शोधकर्ताओं को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाते हैं. उन्होंने कहा कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर समाधान देने वाला देश बनता जा रहा है. संदीप सावर्ण, नयी दिल्ली
