BBC IT Raid: बीबीसी के दिल्ली- मुंबई स्थित कार्यालयों में आयकर की तलाशी, बीबीसी ने किया ये ट्‌वीट

BBC IT Raid: आयकर विभाग का तलाशी अभियान 20-22 जगहों पर जारी है. इस तलाशी अभियान के बारे में लंदन स्थित बीबीसी के कार्यालय को जानकारी दे दी गयी है.

इनकम टैक्स विभाग ने आज मंगलवार को बीबीसी के दिल्ली और मुंबई स्थित कार्यालय में टैक्स चोरी की जांच के तहत एक ‘सर्वे ऑपरेशन’ चलाया. इस तलाशी अभियान में आयकर विभाग के 15 अधिकारी शामिल हैं. इस संबंध में अधिकारियों ने जानकारी दी है.

कुछ कर्मचारियों के फोन चेक किये गये

जानकारी के अनुसार वित्तीय अनियमितताओं के मामले में आयकर विभाग ने तलाशी अभियान चलाया है. सूत्रों के हवाले से आजतक ने यह जानकारी दी है कि कर्मचारियों के फोन सीज कर लिये गये हैं. हालांकि एएनआई न्यूज एजेंसी ने जानकारी दी है कि कुछ लोगों के इलेक्ट्राॅनिक डिवाइस वो जानकारी एकत्र करने के लिए उनसे लिया गया था, जिसे फिर वापस कर दिया गया. ये लोग एकाउंट्‌स विभाग से जुड़े थे. खबर है कि आयकर विभाग का तलाशी अभियान 20-22 जगहों पर जारी है. इस तलाशी अभियान के बारे में लंदन स्थित बीबीसी के कार्यालय को जानकारी दे दी गयी है.

निदेशकों के आवास पर नहीं होगी छापेमारी

गौरतलब है कि बीबीसी ने 2002 के गुजरात दंगों और भारत पर दो-भाग का डाॅक्यूमेंट्री बनाया है, जो काफी विवादों में रहा है. इस डाॅक्यूमेंट्री के आने के कुछ सप्ताह बाद यह औचक कार्रवाई हुई है. अधिकारियों ने जानकारी दी है कि विभाग कंपनी के कारोबारी परिचालन और उसकी भारतीय इकाई से जुड़े दस्तावेजों पर गौर कर रहा है. एक सर्वे के तहत, आयकर विभाग केवल कंपनी के व्यावसायिक परिसर की ही जांच करता है और इसके प्रवर्तकों या निदेशकों के आवासों और अन्य स्थानों पर छापा नहीं मारता है.

बीबीसी ने किया ये ट्‌वीट

बीबीसी के दफ्तर में आयकर विभाग की तलाशी अभियान पर बीबीसी की ओर से ट्‌वीट किया गया है कि हम तलाशी में पूरा सहयोग कर रहे हैं. उम्मीद है कि जल्दी ही पूरा मामला सुलझ जायेगा. बीबीसी के दफ्तर में की गयी कार्रवाई पर कांग्रेस ने कहा कि यह अभियान बीबीसी की डाॅक्यूमेंट्री के बाद किया गया है. पहले सरकार ने उसे बैन किया और अब आयकर की कार्रवाई हो रही है.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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