हिमालय की 195 ग्लेशियर झीलें बेहद खतरनाक, मच सकती है तबाही, बढ़ी भारत की टेंशन

नेपाल में ग्लेशियर फटने से मची तबाही के बाद अब भारत के हिमालयी इलाकों पर भी खतरे की बात कही जा रही है. यहां हजारों ग्लेशियर झीलें किसी बड़े खतरे का कारण बन सकती हैं. इनमें से 195 झीलों को हाई रिस्क माना गया है.

नेपाल में ग्लेशियर फटने से हुई तबाही के बाद भारत सरकार भी सतर्क हो गई है. हिमालयी इलाकों में ग्लेशियर झीलों के फटने और हिमस्खलन के खतरे पर नजर रखी जा रही है. भारतीय हिमालयी क्षेत्र में करीब 7,500 ग्लेशियर झीलें हैं. इनमें 195 झीलों को बेहद खतरनाक मानते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा है.

हिमस्खलन के खतरे को लेकर हाई लेवल मीटिंग

केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर फटने और हिमस्खलन के खतरे को लेकर हाई लेवल मीटिंग की. इसमें संभावित आपदा से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की गई. अधिकारियों को जमीन पर बचाव और राहत की व्यवस्था मजबूत करने का निर्देश दिया गया. संवेदनशील ग्लेशियरों पर लगातार नजर रखने, खतरे वाले इलाकों की पहचान और नक्शा तैयार करने पर जोर दिया गया.


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साथ ही, लोगों को खतरे की पहले जानकारी देने वाली व्यवस्था मजबूत करने और आपदा की स्थिति में उन्हें समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी बेहतर करने को कहा गया. गृह सचिव ने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल घटना के बाद राहत और बचाव तक सीमित नहीं रहना चाहिए. जोखिम आधारित योजनाएं, अग्रिम बचाव उपाय भी पहले से ही जरूरी है.


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छह राज्यों में सबसे अधिक संवेदनशील झीलें

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के आकलन के अनुसार उच्च जोखिम वाली ग्लेशियर झीलों में हिमाचल प्रदेश की 48, सिक्किम की 40, लद्दाख की 35, अरुणाचल प्रदेश की 28, जम्मू-कश्मीर की 26 और उत्तराखंड की 13 झीलें शामिल हैं. इसरो के अनुसार हिमालय क्षेत्र में 10 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाली 2,431 ग्लेशियर झीलें हैं. इनमें 130 भारत में हैं.

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By अमिताभ कुमार

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