कोर्ट ने मेदांता अस्पताल के निदेशक को सोनम वांगचुक की लगातार निगरानी के लिए चिकित्सकों की टीम गठित करने को कहा है. साथ ही कोर्ट ने कहा है कि मेदांता के डॉक्टर प्रोटोकॉल का पालन करेंगे और वांगचुक मेडिकल सलाह मानेंगे. सोनम वांगचुक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले 23 दिनों से आमरण अनशन पर हैं. कोर्ट ने यह सुझाव दिया है कि सोनम वांगचुक का इलाज बेहतर और शांत माहौल में हो सके तथा उनकी स्वास्थ्य स्थिति की स्वतंत्र रूप से निगरानी की जा सके. सोनम वांगचुक की पत्नी ने कोर्ट से यह मांग की थी कि उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती करने की इजाजत दी जाए क्योंकि उनका विश्वास सफदरजंग अस्पताल से उठ गया है. कोर्ट के फैसले पर गीतांजलि अंगमो ने खुशी जताई है.
पत्नी गीतांजलि ने की थी प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि का यह आरोप था कि जंतर-मंतर से बिना उन्हें सूचित किए सोनम वांगचुक को जबरन सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उसके बाद वहां अत्यधिक पुलिस बल की तैनाती की गई थी. गीतांजलि का कहना था कि उनकी रिपोर्ट्स उन्हें नहीं दी जा रही है और उन्हें रिपोर्ट्स पर भरोसा नहीं है. गीतांजलि यह भी कह रही थीं कि उन्हें अस्पताल के रवैये और इलाज पर भरोसा नहीं है. अगर सरकार यह चाहती है कि सोनम वांगचुक का अच्छे से इलाज हो और उन्हें उनके सेहत की चिंता है तो अस्पताल चुनने का अधिकार उन्हें दिया जाना चाहिए. हालांकि रविवार को हाईकोर्ट ने गीतांजलि अंगमो की मांग को ठुकरा दिया था.
28 जून से आमरण अनशन पर हैं सोनम वांगचुक
नीट पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों को समर्थन देने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर सोनम वांगचुक 28 जून से आमरण अनशन पर हैं. 18 जुलाई को जब उनका अनशन 21वें दिन में पहुंच गया था और उनकी सेहत बिगड़ने लगी तो दिल्ली पुलिस ने उन्हें जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया था. अस्पताल ने बताया था कि लंबे उपवास के कारण उनके शरीर में पानी की कमी हो गई है और पोटैशियम का स्तर भी काफी कम हो गया है, जो चिंता की बात है.
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