स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्द्धन ने कहा- हमारे देश में कोरोना से मृत्यु दर विश्व की तुलना में कम, रिकवरी रेट 31.7 प्रतिशत

स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्द्धन ने आज कहा कि कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में हम बखूबी लड़ रहे हैं, यही कारण कि इस बीमारी के खिलाफ हमारी रिकवरी रेट बहुत अच्छी है. हम यह देख रहे हैं कि रिकवरी रेट लगातार बढ़ रही है और यह बढ़ते-बढ़ते 31.7 प्रतिशत पर पहुंच गयी है. डॉ हर्षवर्द्धन ने आज जम्मू-कश्मीर के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बातचीत की जिसमें उन्होंने यह बातें कही.

नयी दिल्ली : स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्द्धन ने आज कहा कि कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में हम बखूबी लड़ रहे हैं, यही कारण कि इस बीमारी के खिलाफ हमारी रिकवरी रेट बहुत अच्छी है. हम यह देख रहे हैं कि रिकवरी रेट लगातार बढ़ रही है और यह बढ़ते-बढ़ते 31.7 प्रतिशत पर पहुंच गयी है. डॉ हर्षवर्द्धन ने आज जम्मू-कश्मीर के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बातचीत की जिसमें उन्होंने यह बातें कही.

उन्होंने कहा कि कोरोना के साथ लड़ाई में जो बात हमें खुशी देती है वह है कम मृत्यु दर. डॉ हर्षवर्द्धन ने कहा कि हमारे देश में दुनिया के मुकाबले मृत्यु दर कम है. आज मृत्यु दर लगभग 3.2% है, कई राज्यों में यह इससे भी कम है, जबकि वैश्विक मृत्यु दर लगभग 7-7.5% है.

गौरतलब है कि कल स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से यह कहा गया था कि सरकार ने कोरोना संक्रमित लोगों की डिस्चार्ज नीति में बदलाव किया है और अब अगर कोई मरीज 10 दिन से अधिक समय अस्पताल में रह चुका है और उसे लगातार तीन दिनों तक दवाई के बिना बुखार ना आये तो उसे बिना जांच के अस्पताल से छुट्टी दी जायेगी. हालांकि सरकार ने यह भी कहा है कि अस्पताल से छुट्टी के बाद सात दिनों तक उसे होम आइसोलेशन में रहना पड़ेगा.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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