590 करोड़ रुपये का घोटाला, हरियाणा सरकार के बैंक खातों में हेराफेरी, 4 कर्मचारी निलंबित

Haryana Bank Fraud 590 Crore Rupees: हरियाणा सरकार के बैंक खातों में 590 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है. इस मामले में बैंक के ही चार कर्मचारियों को निलंबित किया गया है. इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब सरकार ने अपना खाता इस बैंक से बंद कर दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने का आवेदन लेकर पहुंची.

Haryana Bank Fraud 590 Crore Rupees: बैंकिंग दुनिया से एक यह खबर भरोसे को झकझोर देने वाली है. IDFC FIRST Bank की चंडीगढ़ शाखा में हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ खातों में करीब 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है. बैंक की आधिकारिक स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, इस मामले में बैंक ने चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है. दोषी पाए जाने पर कर्मचारियों व बाहरी व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक, दीवानी और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी. बैंक ने मामले की आंतरिक जांच शुरू कर दी है और कहा है कि वह कानूनी व अनुशासनात्मक कार्रवाई के जरिए धन की वसूली करेगा. 

फाइलिंग के अनुसार, प्रारंभिक आंतरिक समीक्षा में सामने आया है कि यह मामला हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ विशिष्ट खातों तक सीमित है, जो चंडीगढ़ स्थित शाखा के माध्यम से संचालित हो रहे थे. बैंक ने स्पष्ट किया कि इसका असर चंडीगढ़ शाखा के अन्य ग्राहकों पर नहीं पड़ा है. पहचाने गए खातों में समायोजन (रिकन्सिलिएशन) के तहत कुल राशि लगभग 590 करोड़ रुपये है.

कैसे पकड़ में आया मामला?

मामला तब खुला, जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना खाता बंद कर धनराशि दूसरे बैंक में ट्रांसफर कराने के लिए आवेदन दिया. बैंक ने जब दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की, तो सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज रकम और बैंक के सिस्टम में दिखाई दे रहे बैलेंस में बड़ा अंतर था.

इसके बाद 18 फरवरी से जांच की प्रक्रिया तेज हुई. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, हरियाणा सरकार की अन्य इकाइयों ने भी अपने खातों का विवरण मांगा. वहां भी यही सामने आया कि खातों में दिखाई देने वाली राशि वास्तव में मौजूद नहीं थी. आखिरकार 21 फरवरी को बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में बताया कि शुरुआती जांच में यह आंकड़ा लगभग 590 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.

बैंक क्या एक्शन ले रहा?

इस घटना के प्रभाव का आकलन अतिरिक्त जानकारी मिलने के बाद किया जाएगा. इसमें दावों के सत्यापन, अन्य बैंकों में रखे गए कथित धोखाधड़ी से जुड़े लाभार्थी खातों पर लियन लगाने सहित वसूली, लेनदेन में शामिल अन्य संस्थाओं की देनदारियों और कानूनी वसूली प्रक्रिया के आधार पर एक्शन लिए जाएंगे. बैंक ने अंदेशा जताया है कि इन कर्मचारियों ने बाहरी लोगों या संस्थाओं के साथ मिलकर इस पूरी योजना को अंजाम दिया हो सकता है.

हरियाणा सरकार ने धनराशि को ट्रांसफर करने के दिए आदेश

इस बीच, हरियाणा सरकार के वित्त विभाग (संस्थागत वित्त एवं क्रेडिट नियंत्रण) ने AU Small Finance Bank के साथ-साथ IDFC FIRST Bank को सरकारी कार्यों के लिए तत्काल प्रभाव से डी-एम्पैनल कर दिया है. विभाग ने सभी सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और सार्वजनिक उपक्रमों को निर्देश दिया है कि वे इन बैंकों में रखी गई सरकारी धनराशि को अन्य अधिकृत बैंकों में स्थानांतरित करें और संबंधित खाते तुरंत बंद करें. आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि अगले आदेश तक इन बैंकों के जरिए कोई भी सरकारी धन जमा, निवेश या लेनदेन नहीं किया जाएगा.

कांग्रेस ने उठाए सवाल

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के नेता राव नरेंद्र सिंह ने गंभीर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि यह कथित धोखाधड़ी केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि जन विश्वास पर सीधा हमला है. उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी रकम ऊपरी स्तरों पर लापरवाही या मिलीभगत के बिना कैसे निकाली जा सकती है, और क्या आंतरिक ऑडिट व सरकारी वित्तीय नियंत्रण सिर्फ कागजी औपचारिकता बनकर रह गए थे.

राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि केवल चार अधिकारियों का निलंबन पर्याप्त नहीं है. उन्होंने निष्पक्ष, समयबद्ध और पारदर्शी जांच, जिम्मेदार लोगों की सार्वजनिक पहचान और दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की, यह जोर देते हुए कि यह जनता का पैसा है, कोई निजी खजाना नहीं.

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By Anant narayan shukla

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