संसद के मानसून सत्र में लगातार हुए हंगामे और कार्यवाही बाधित होने के बीच राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने सरकार और विपक्ष दोनों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. एएनआई को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि संसद को चलाने की जिम्मेदारी किसी एक पक्ष की नहीं, बल्कि सरकार और विपक्ष दोनों की बराबर है.
राजनीतिक पार्टियों की संविधान में आस्था पर किया सवाल
हरिवंश ने कहा कि अगर सरकार या विपक्ष में से कोई एक पक्ष सदन की कार्यवाही रोकने पर अड़ जाता है, तो संसद में वही स्थिति होती है, जो फिलहाल के दिनों में देखने को मिली. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि राजनीतिक पार्टियां लगातार संविधान की बात करती हैं और उसकी कॉपियां लेकर चलती हैं, लेकिन उनके वास्तविक व्यवहार में संविधान में आस्था कितनी दिखाई देती है?
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संसद का सही ढंग से चलना बहुत जरूरी
हरिवंश ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक और सुरक्षा परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे समय में संसद की कार्यवाही का सही ढंग से चलना बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा, हमें अपनी पिछली पीढ़ी से पूछना चाहिए कि 2014 के बाद हमने ‘विकसित भारत’ का सपना क्यों देखा?” उन्होंने जोर दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में कम से कम संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलना सुनिश्चित किया जाना चाहिए.
संकट के वक्त पक्ष-विपक्ष एक सुर में बोले
हरिवंश ने कहा कि विश्व अभी गंभीर एनर्जी क्रासिस के दौर से गुजर रहा है, बावजूद इसके हमारे देश में उतनी बदतर स्थिति नहीं है. इसकी वजह यह है कि हमने खुद को मजबूत किया है. ऐसे में जब संकट के हालात हैं, देश के लोगों को एक साथ आकर देश चलाना चाहिए ना कि संसद को बाधित करके लोकतंत्र के मंदिर को ठप करना चाहिए.
