Gaurav Gogoi on CJP protest : लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. CJP आंदोलन को लेकर उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुरुआत में ही धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से हटा देते, तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती. गोगोई ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए और सदन में NEET पेपर लीक मामले और शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर चर्चा कराने की मांग भी की.
CJP के मुद्दों का कांग्रेस ने किया समर्थन
मामले को लेकर गौरव गोगोई ने इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में कहा कि कांग्रेस CJP के उन मुद्दे का समर्थन करती है, जिसमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की जा रही है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी पहले भी इस मुद्दे पर छात्रों के साथ एकजुटता जता चुके हैं. गोगोई ने दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान युवाओं पर पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की.
संसद परिसर में मोबाइल नेटवर्क जाम
गोगोई ने दावा किया कि सांसदों को कोई पूर्व सूचना के बिना ही संसद परिसर में मोबाइल नेटवर्क जाम कर दिया गया था. उन्होंने कहा कि सांसद सोशल मीडिया या समाचार नहीं देख पा रहे थे और बाद में उन्हें पता चला कि संसद के बाहर प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई चल रही थी. उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि विपक्ष ने इस मुद्दे पर संसद में चर्चा की मांग की, लेकिन सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया.
युवा किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं
सोमवार को हुए आंदोलन में कांग्रेस के नेतृत्व और किसी राजनीतिक पार्टी की भूमिका नहीं होने, को लेकर किए गए सवाल पर गोगोई ने कहा कि यह जरूरी नहीं है और इसकी तुलना करना भी सही नहीं होगा.उनके मुताबिक कांग्रेस के छात्र और युवा संगठनों के कार्यक्रमों में भी बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं. उन्होंने कहा कि आज कई युवा ऐसे मंचों को पसंद करते हैं जो किसी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं हैं. उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिक्षा सुधार के मुद्दे पर युवा, समाज और विपक्ष एक साथ हैं.
क्या होगी विपक्ष की आगे की रणनीति ?
गोगोई ने कहा कि विपक्ष संसद में लगातार NEET पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग उठाता रहेगा. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल करते हुए कहा कि जब भाजपा चुनाव से पहले कई राज्यों में अपने मुख्यमंत्रियों को बदल देती है, तो फिर शिक्षा मंत्री को बदलने से परहेज क्यों किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यदि सरकार इसी तरह इन मुद्दों को नजरअंदाज करती रही, तो भविष्य में उसे इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. ये भी पढ़ें : संसद मार्च के लिए CJP ने क्यों चुनी 20 जुलाई की तारीख, जानिए मानसून सत्र को लेकर क्या है रणनीति?
