Video: कहीं 21 हजार पानीपुरी तो कहीं चॉकलेट से तैयार बप्पा की प्रतिमा, देखिए गणपति के अनोखे रूप

गणेश उत्सव 2026 में देश के कई शहरों में गणपति की अनोखी प्रतिमाएं आकर्षण का केंद्र बनी हैं. कहीं 21 हजार पानीपुरी से बप्पा का स्वरूप तैयार किया गया तो कहीं चॉकलेट, मसालों और पौधों का इस्तेमाल हुआ.जो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है.

देशभर में गणेशोत्सव की धूम है. हर बार की तरह इस बार भी गणपति बप्पा की भक्ति के बीच पंडालों में रचनात्मकता के कई अनोखे रंग देखने को मिल रहे हैं. कहीं पानीपुरी से गणपति की प्रतिमा तैयार की गई है तो कहीं पौधों, मसालों और बांस जैसी चीजों का इस्तेमाल किया गया है. अलग-अलग शहरों की ये प्रतिमाएं श्रद्धा के साथ लोगों की जिज्ञासा का भी केंद्र बनी हुई हैं.

पुणे में 21 हजार पानीपुरी से बने बप्पा

  • महाराष्ट्र के पुणे में इस बार पानीपुरी से तैयार गणपति की प्रतिकृति चर्चा में है. रिपोर्ट के मुताबिक करीब 21 हजार पानीपुरी का इस्तेमाल कर लगभग 13 फीट ऊंची बप्पा की प्रतिमा तैयार की गई है.स्थानीय लोगों के अनुसार इसे तैयार करने में कारीगरों को 3 महीने का समय लगा है.
पुणे के FC रोड पर 21,000 पानीपुरी का इस्तेमाल कर गणपति बप्पा की अनोखी मूर्ति तैयार की गई है.
  • इस प्रतिमा की खास बात यह है कि उत्सव के बाद पानीपुरी को पारंपरिक तरीके से पानी में विसर्जित करने के बजाय जैविक खाद में बदलने की योजना बताई गई है. इसका मकसद खाद्य सामग्री को व्यर्थ होने से बचाना और पर्यावरण पर असर कम करना है.

विशाखापट्टनम में पौधों से तैयार हुआ सस्य गणपति

  • आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में जीवित पौधों से तैयार गणपति का स्वरूप भी लोगों का ध्यान खींच रहा है. मीडिया रिपोर्ट में इसे ‘सस्य गणपति’ बताया गया है.
  • यहां हजारों जीवित पौधों का इस्तेमाल कर करीब 18 फीट ऊंची प्रतिमा तैयार किए जाने की जानकारी है. इस तरह की पहल गणेश उत्सव में पर्यावरण से जुड़े संदेश को सामने लाती है.
चेन्नई के कोलाथुर में 12 हजार सफेद शंखों से बनी 40 फीट ऊंची गणपति प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.

मसालों से लेकर बांस तक, बप्पा के प्रतिमा के साथ अनोखा प्रयोग

  • गणपति की अनोखी प्रतिमाओं का सिलसिला सिर्फ पुणे और विशाखापट्टनम तक सीमित नहीं है. महाराष्ट्र के वाशिम में सौंफ, सुपारी और इलायची जैसी चीजों से गणेश प्रतिमा तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है. वहीं चंद्रपुर में बांस से गणपति की प्रतिमा बनाई गई है.
पौधों से सजाईं बप्पा की मूर्तियां
  • ओडिशा के गजपति में सिक्कों और चॉकलेट से तैयार गणपति का स्वरूप भी चर्चा में है. छत्तीसगढ़ के भिलाई में 101 इको-फ्रेंडली गणपति प्रतिमाएं स्थापित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है.

मुंबई और हैदराबाद में दिखी अलग थीम

  • मुंबई के साकीनाका में गणपति की विशाल प्रतिमाओं को अलग-अलग धार्मिक स्वरूपों में प्रस्तुत किया गया है.
  • रिपोर्ट के अनुसार, यहां 43 फीट ऊंचे गणपति को खंडोबा अवतार और 33 फीट ऊंचे गणपति को विट्ठल स्वरूप में सजाया गया है.
  • हैदराबाद में बच्चों को ध्यान में रखते हुए कैंडी और चॉकलेट से गणपति की प्रतिमा तैयार किए जाने की जानकारी भी सामने आई है.
  • इसके अलावा देश के कई पंडालों में तकनीक, स्थानीय संस्कृति, धार्मिक परंपरा और पर्यावरण जैसे विषयों को सजावट की थीम बनाया गया है.

आस्था के साथ रचनात्मकता का मेल

गणेश उत्सव के दौरान ऐसी प्रतिमाएं केवल सजावट का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि लोगों के लिए आकर्षण और चर्चा का विषय भी बन रही हैं. जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. गणेश उत्सव 2026 में देश के कई हिस्सों में बप्पा के अनोखे रूप लोगों का ध्यान खींच रहे हैं. पानीपुरी से लेकर जीवित पौधों और बांस तक, इन प्रयोगों में भक्ति के साथ कला और रचनात्मकता की झलक भी दिखाई दे रही है.

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लेखक के बारे में

By गौतम कुमार

गौतम कुमार वर्तमान में प्रभात खबर से जुड़े पत्रकार और लेखक हैं. वे राजनीति, इतिहास, साहित्य, खेल, कानून, लोक संस्कृति और मनोरंजन जैसे विविध विषयों पर लिखते हैं. इसके साथ-साथ  ट्रेंडिंग, यूटिलिटी और वायरल हो रहे जरूरी विषयों पर भी लेखन करते हैं. रिपोर्टिंग या लेखन के दौरान उनका जोर केवल घटनाओं की जानकारी देने पर नहीं, बल्कि उसके पीछे की पृष्ठभूमि, सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ और उसके प्रभाव को समझाने पर रहता है.

अपने पत्रकारिता करियर में गौतम कुमार ने RealisticMedia और दैनिक भास्कर जैसे मीडिया संस्थानों के साथ मिलाकर 2 साल से अधिक समय तक काम किया है. पत्रकारिता के अलावा उन्हें डिजिटल कंटेंट लेखन, वीडियो स्क्रिप्टिंग और डिजिटल प्रोडक्शन का अनुभव भी है.

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गौतम मानते हैं कि किसी विषय पर लोगों की राय और उनका विचार अलग हो सकता है, संभव है नजरिया भी अलग हो, लेकिन सार्थक संवाद की शुरुआत इन्हीं अलग-अलग दृष्टिकोणों को समझने से होती है. इसलिए पाठक अपनी राय, सुझाव और विचार रखने के लिए उनसे सोशल मीडिया के माध्यम से जुड़ सकते हैं.

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