Fact Check: ईवीएम हैकिंग से जीता गया था गुजरात और हिमाचल प्रदेश का चुनाव? जानिए वायरल मैसेज का सच

गुजरात और हिमाचल प्रदेश चुनाव को लेकर जो मैसेज इस समय सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है, उसकी पड़ताल पीआईबी की फैक्ट चेक टीम ने की. जिसमें पीआईबी ने पाया कि खबर पूरी तरह से फेक है.

गुजरात और हिमाचल प्रदेश में इसी साल विधानसभा का चुनाव होना है. जिसके लिए भाजपा सहित तमात राजनीतिक पार्टियां जोर-आजमाइश में लग गयी हैं. इधर चुनावी पारा बढ़ने के साथ फेक खबरों का बाजार भी गर्म होने लगा है. इस समय सोशल मीडिया में एक खबर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि गुजरात और हिमाचल प्रदेश में पिछली बार जो विधानसभा चुनाव हुए थे, उसमें ईवीएम हैकिंग कर जीत दर्ज की गयी थी. आइये वायरल मैसेज की पड़ताल करें.

क्या किया जा रहा है वायरल मैसेज में दावा

दरअसल सोशल मीडिया में जो गुजरात और हिमाचल प्रदेश चुनाव को लेकर खबर वायरल हो रही है, उसमें दावा किया जा रहा है कि पिछले चुनाव में दोनों राज्यों में ईवीएम हैकिंग के जरिये जीत दर्ज की गयी थी. खबर को मजबूती देने के लिए पूर्व चुनाव आयुक्त टी एस कृष्णमूर्ति के फर्जी बयान का सहारा लिया गया.


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क्या है वायरल मैसेज का सच

गुजरात और हिमाचल प्रदेश चुनाव को लेकर जो मैसेज इस समय सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है, उसकी पड़ताल पीआईबी की फैक्ट चेक टीम ने की. जिसमें पीआईबी ने पाया कि खबर पूरी तरह से फेक है और लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है. पीआईबी ने बताया कि इस बारे में भारतीय चुनाव आयोग ने पहले ही प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपना स्पष्टीकरण जारी किया था.

गलत खबर के खिलाफ चुनाव आयोग ने दर्ज की थी एफआईआर

मालूम हो गुजरात और हिमाचल प्रदेश चुनाव को लेकर गलत खबर चलाने को लेकर चुनाव आयोग ने सख्त कदम उठाया था और एफआईआर दर्ज कराया था. खुद पूर्व चुनाव आयुक्त टी एस कृष्णमूर्ति ने भी खबरों का खंडन किया था. उन्होंने अपना बयान जारी कर कहा कि यह मेरे संज्ञान में लाया गया है कि कुछ समय पहले एक हिंदी समाचार पत्र में छपी एक फर्जी खबर को फिर से सक्रिय किया जा रहा है और फिर से प्रसारित किया जा रहा है. जैसे कि मैं इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन, ईवीएम की विश्वसनीयता के बारे में संदेह व्यक्त कर रहा हूं. यह आगामी चुनावों में गलत धारणा फैलाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, तो की पूरी तरह से गलत है. मैं दोहराना चाहूंगा कि ईवीएम सबसे विश्वसनीय हैं और मुझे इसकी प्रभावकारिता और विश्वसनीयता के बारे में कोई संदेह नहीं है. इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन वास्तव में हमारे देश के लिए गर्व है और इसकी विश्वसनीयता के बारे में कोई संदेह नहीं हो सकता है.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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