Environment: ग्रीन वॉल पहल के तहत अरावली को हरा-भरा बनाने की हो रही है कोशिश
सरकार ने देश की 26 मिलियन हेक्टेयर खराब भूमि को उर्वरक बनाने के लिए अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट शुरू किया है. इसके तहत अरावली क्षेत्र में 6.45 मिलियन हेक्टेयर खराब भूमि की पहचान की गयी है.
Environment: अरावली बचाने को लेकर हाल के दिनों में आंदोलन हुए. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को अपने फैसले को बदलना पड़ा और केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र में खनन कार्य के लिए दिए गए सभी पट्टों पर रोक लगा दी. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बुधवार को अरावली ग्रीन वॉल को मजबूती शीर्षक पर अरावली परिदृश्य के पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया. इस दौरान संकल्प फाउंडेशन द्वारा तैयार की गयी ‘अरावली परिदृश्य का पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन’ शीर्षक वाली एक रिपोर्ट भी जारी की.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और यूएनसीसीडी के तहत देश की 26 मिलियन हेक्टेयर खराब भूमि को उर्वरक बनाने के लिए अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट शुरू किया है. इसके तहत अरावली क्षेत्र में 6.45 मिलियन हेक्टेयर खराब भूमि की पहचान की गयी है. इसमें गुजरात, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में 2.7 मिलियन हेक्टेयर से अधिक भूमि पर हरियाली लाने का काम शुरू किया गया है. अरावली के आसपास 29 जिलों के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर इस प्रोजेक्ट को लागू कर रहे हैं. इसके तहत शुष्क और अर्ध-शुष्क परिस्थितियों के लिए उपयुक्त स्थानीय प्रजातियों के वृक्षारोपण पर जोर दिया जा रहा है.
पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है अरावली
भूपेंद्र यादव ने कहा कि आजादी के बाद अरावली को बचाने और हरा-भरा बनाने के लिए एक बड़ा नीतिगत कदम उठाया गया है. अरावली देश की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला है और इसने हजारों सालों से मानव सभ्यता को आश्रय देने का काम किया है. अरावली इकोसिस्टम चार टाइगर रिजर्व और 18 संरक्षित क्षेत्रों से सुरक्षित है. सरकार इन क्षेत्र को और हरा-भरा करने के लिए कदम उठा रही है. भारत ने वन्यजीव संरक्षण में वैश्विक नेतृत्व को स्वीकार किया है और गौर करने वाली बात है कि दुनिया की सात बिग कैट प्रजातियों में से पांच का आवास स्थल भारत में है. दुनिया की लगभग 70 फीसदी बाघों की आबादी भारत में है और यह लगातार बढ़ रही है.
पिछले दो-तीन सालों में अरावली क्षेत्र में हजारों हेक्टेयर जमीन को उर्वर किया गया है. मौजूदा समय में भारत, पारिस्थितिकी स्थायित्व और आर्थिक आकांक्षाओं के बीच संतुलन बनाने के लिए एक मजबूत और संतुलित दृष्टिकोण अपना रहा है. सरकार अरावली और देश भर में इसी तरह के इकोसिस्टम की बहाली और संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है. सम्मेलन में मरुस्थलीकरण और भूमि क्षरण से निपटने के लिए जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट’ को मजबूत करने के लिए एक वैज्ञानिक, समुदाय-आधारित कदम उठाया जाना चाहिए.
