Energy Transition : भारत ने ग्रीन जाॅब्स क्रियेट करने में मारी बाजी, 2021 में 8.63 लाख को मिला रोजगार

रिन्यूएबल एनर्जी एंड जाॅब्स-एनुअल रिव्यू 2022 के अनुसार भारत में सोलर एनर्जी के क्षेत्र में दो लाख 17 हजार लोगों को नौकरी मिली जबकि चार लाख 14 हजार लोगों को हाइड्रोपावर के क्षेत्र में नौकरी दी गयी है.

रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने की बातें तो पूरा विश्व कर रहा है, लेकिन अभी तक इस क्षेत्र में रोजगार सृजित करने की दिशा में बहुत कम देश ही खुलकर सामने आ पाये हैं. इस लिहाज से अगर भारत की बात करें तो भारत ने वर्ष 2021 में रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में कुल 8.63 लोगों को रोजगार दिया है.

भारत ने आठ लाख 63 हजार को रोजगार दिया

इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी ( International Renewable Energy Agency) और इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन ने एक संयुक्त रिपोर्ट रिन्यूएबल एनर्जी एंड जाॅब्स-एनुअल रिव्यू 2022 नाम से जारी की है. इस रिपोर्ट में यह बताया गया है कि वर्ष 2020-21 में भारत ने लगभग आठ लाख 63 हजार लोगों को रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में रोजगार दिया है.

रिन्यूएबल एनर्जी एंड जाॅब्स-एनुअल रिव्यू 2022

रिन्यूएबल एनर्जी एंड जाॅब्स-एनुअल रिव्यू 2022 के अनुसार भारत में सोलर एनर्जी के क्षेत्र में दो लाख 17 हजार लोगों को नौकरी मिली जबकि चार लाख 14 हजार लोगों को हाइड्रोपावर के क्षेत्र में नौकरी दी गयी है. यह रिपोर्ट भारत के लिए बहुत ही सुकून देने वाली है, क्योंकि भारत लगातार ग्रीन ग्रोथ और ग्रीन जाॅब्स पर जोर दे रहा है. 2070 तक भारत ने नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य भी रखा है, लेकिन यह लक्ष्य तभी पूरा हो सकता है जब भारत लगातार एनर्जी ट्रांजिशन की ओर बढ़े.

भारत को कोयले पर निर्भरता कम करनी होगी

एनर्जी ट्रांजिशन के लिए यह जरूरी है कि भारत कोयले पर निर्भरता कम करे. हालांकि हाल के दशक में यह बहुत संभव प्रतीत नहीं होता है क्योंकि कोयला भारत में ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है और अभी तक सोलर और हाइड्रो पावर इसका विकल्प नहीं बन पाया है. इसके लिए सरकारों को दृढ़इच्छाशक्ति का प्रदर्शन करना होगा और एनर्जी ट्रांजिशन की तरफ जाना होगा.

ग्रीन जाॅब्स पर संयुक्त रिपोर्ट

ग्रीन जाॅब्स पर आधारित इस संयुक्त रिपोर्ट में यह बताया गया है कि विश्व के कौन से देश ग्रीन जाॅब्स के क्षेत्र में बेहतर काम कर रहे हैं. ग्रीन जाॅब्स के क्षेत्र में बेहतर काम करने वालों में चीन, ब्राजील, अमेरिका, भारत और यूरोपीय यूनियन के कुछ देश शामिल हैं.

12.7 मिलियन ग्रीन जाॅब्स क्रियेट किये गये

वर्ष 2020-21 में कुल 12.7 मिलियन ग्रीन जाॅब्स क्रियेट किये गये, जिसमें से 5.4 मिलियन चीन ने दिये, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग एक मिलियन ज्यादा है. इस रिपोर्ट में यह कहा गया है कि एशियाई देश ग्रीन जाॅब्स देने में आगे हैं.

सोलर एनर्जी के क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सोलर एनर्जी के क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं बहुत बढ़ी हैं. रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में सोलर पावर तीसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है जो ग्रीन जाॅब्स क्रियेट कर रहा है. भारत ने वर्ष 2020-21 में 10.3 गीगावाट सोलर एनर्जी का उत्पादन किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में दोगुने से अधिक था क्योंकि 2020 में 4.2 गीगावाट का उत्पादन किया गया था.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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