DMK की संसदीय दल की नेता और सांसद कनिमोझी ने मुख्यमंत्री विजय की इस पहल पर सवाल उठाते हुए कहा कि संसद सत्र खत्म होने में महज कुछ दिन बचे हैं और केंद्र सरकार ने परिसीमन पर कोई नया विधेयक या चर्चा शुरू नहीं की है. ऐसे में यह बैठक पूरी तरह से निरर्थक है.
DMK निष्पक्ष परिसीमन के पक्ष में है : कनिमोझी
कनिमोझी ने आरोप लगाया कि यह बैठक मेकेदातु बांध जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे से जनता का ध्यान भटकाने के लिए बुलाई गई है. उन्होंने कांग्रेस नेताओं की आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि DMK निष्पक्ष परिसीमन के पक्ष में है. उन्होंने कहा, राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए उसे किसी से सीख लेने की जरूरत नहीं है. DMK सांसद ए राजा ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि TVK सरकार ऐसे विषय पर चर्चा का नाटक कर रही है, जिसकी उसे समझ ही नहीं है.
अन्नाद्रमुक की आपत्ति: जल्दबाजी में रचा गया नाटक
अन्नाद्रमुक ने कहा कि परिसीमन को लेकर संसद में न तो कोई नया विधेयक आया है और न ही कोई आधिकारिक घोषणा हुई है. अन्नाद्रमुक ने सवाल उठाया कि जब कोई नया घटनाक्रम हुआ ही नहीं है, तो मुख्यमंत्री सांसदों की बैठक बुलाकर जल्दबाजी में नाटक क्यों कर रहे हैं?
प्रशासनिक तंत्र के दुरुपयोग का आरोप
बैठक से दूरी बनाने वाली पार्टियों ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य के प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल सांसदों पर बैठक में आने का दबाव बनाने के लिए किया गया. द्रमुक का कहना है कि मुख्य सचिव सीधे सांसदों को पत्र भेजकर और फोन करके टीवीके के राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं, जो पूरी तरह से गलत है.
इन प्रमुख दलों और सांसदों ने बनाई दूरी
- DMK: 22 लोकसभा और 8 राज्यसभा सदस्य (कुल 30 सांसद) अनुपस्थित रहे.
- AIDMK: 4 राज्यसभा सदस्य अनुपस्थित रहे.
- अन्य दल: पीएमके (1 राज्यसभा सांसद), डीएमडीके (1 राज्यसभा सांसद) और एमएनएम (1 राज्यसभा सांसद) के प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल नहीं हुए.
तमिलनाडु के कुल 57 सांसदों में से केवल 19 से 21 सांसदों (मुख्यतः कांग्रेस, वीसीके, सीपीआई, सीपीआई-एम, एमडीएमके और आईयूएमएल) ने ही इस बैठक में भाग लिया. बहुमत सांसदों द्वारा इस बैठक से दूरी बनाए जाने के कारण परिसीमन पर सर्वसम्मति बनाने का मुख्यमंत्री विजय का यह प्रयास राजनीतिक विवादों में घिर गया है.
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