AC blast : दिल्ली के हौज खास इलाके में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी धनेंद्र कुमार की मौत उनके घर पर एसी ब्लास्ट होने से हो गई.जिस वक्त घर में आग लगी उनके घर पर परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद थे. जानकारी के अनुसार धनेंद्र कुमार को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन कमरे में अत्यधिक धुआं होने की वजह से वे बेहोश हो गए थे और बाद में उनकी मौत हो गई.
दम घुटने से हुई मौत
साउथ दिल्ली के डीसीपी अनंत मित्तल ने मीडिया को बताया कि 27 मई को रात करीब 11.18 बजे, हौज खास पुलिस स्टेशन को एक घर में आग लगने की खबर मिली. इस सूचना पर तुरंत एक्शन लिया गया. हमारी टीम मौके पर पहुंची.हमें यह जानकारी मिली कि दो घायल लोगों को पहले ही एक PCR में हॉस्पिटल ले जाया जा चुका था और एडमिशन प्रोसेस चल रहा था. मौके पर पहुंचे ऑफिसर्स ने तुरंत पास के सोर्स से बाल्टियों में पानी भरकर आग बुझाने की कोशिश की. थोड़ी देर बाद, फायर ब्रिगेड आ गई और आग पर काबू पा लिया गया. घायल लोगों की बाद में पहचान हो गई, उनमें से एक धनेंद्र कुमार थे, जो 1968 बैच के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी थे. ऐसा लगता है कि उनके कमरे में लगे एसी यूनिट में कोई खराबी आ गई थी, जिससे धुआं निकला और आग लग गई. धुएं की वजह से उनका दम घुट गया और वे कमरे के अंदर बेहोश हो गए. उनके परिजनों ने उन्हें कमरे से निकाला, जब उन्हें अस्पताल ले जाया जा रहा था, तो वह बेहोश थे, लेकिन बाद में इस घटना की वजह से उनकी मौत हो गई. हमने इस घटना के संबंध में एक एफआईआर दर्ज की है.
फायर सर्विस के पहुंचने से पहले आईएएस अधिकारी को निकाल लिया गया था
डिप्टी सीएफओ अभिलाष कुमार मल्लिक ने बताया कि 27 मई की रात को, फायर सर्विस को हौज खास में आग लगने की सूचना मिली. मौके पर 2 फायर टेंडर तैनात किए गए. फायर ऑफिसर्स ने रात करीब 12.20 पर बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है और फायर सर्विस के आने से पहले ही अंदर मौजूद लोगों को निकाल लिया गया था. मुझे न्यूज से पता चला कि बचाए गए दो लोगों में से एक की मौत हो गई है. धनेंद्र कुमार की पड़ोसी प्रिया बसु ने बताया कि रात में, मुझे आग लगने का एक ग्रुप मैसेज मिला. पहले तो मुझे लगा कि यह मामूली है, लेकिन जब मैंने बाहर देखा, तो मुझे एक धधकती आग दिखाई दी. मैं भागकर नीचे गई क्योंकि मेरी कार उनके घर के सामने थी और मुझे उसे फायर ब्रिगेड या एम्बुलेंस के लिए हटाना था. अपनी कार हटाने के बाद, मैंने देखा कि पूरा ग्राउंड फ्लोर जल रहा था. यह बहुत बुरा था. पड़ोसी मदद के लिए इकट्ठा हुए. आंटी को बेटा बाहर ले आया, लेकिन बदकिस्मती से, अंकल कुछ ज्यादा देर तक अंदर रह गए.
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