जस्टिस विमल कुमार यादव ने यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें एक व्यक्ति पर अपनी पत्नी को कथित तौर पर जबरन Baygon insecticide पिलाकर हत्या का प्रयास करने का आरोप था. ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराया था, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने उसे बरी कर दिया.
कोर्ट ने क्यों किया पति को बरी?
हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 307 के तहत जरूरी इरादा या जानकारी को संदेह से परे साबित नहीं कर पाया. कोर्ट के अनुसार मामले में मेडिकल और फॉरेंसिक सबूत भी पूरी तरह मजबूत नहीं थे. इसलिए केवल उपलब्ध परिस्थितियों के आधार पर हत्या के प्रयास का दोष कायम रखना सुरक्षित नहीं था.
मेडिकल और फॉरेंसिक सबूत पर भी उठे सवाल
हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में मेडिकल और फॉरेंसिक साक्ष्य “slightly shaky wicket” पर थे. कोर्ट ने गौर किया कि पीड़िता को अस्पताल ले जाने के बाद उल्टी की शिकायत जरूर सामने आई, लेकिन शुरुआती मेडिकल जांच में उसके पैरामीटर सामान्य थे और डॉक्टरों को जहर दिए जाने के स्पष्ट लक्षण नहीं मिले.
- कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल उल्टी होने के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पीड़िता को जहरीला पदार्थ पिलाया गया था.
- इसके अलावा, फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए gastric lavage में भी किसी जहरीले पदार्थ का निशान नहीं मिला.
Insecticide की बोतल को लेकर भी विरोधाभास
अदालत ने कथित insecticide कंटेनर को लेकर सामने आए विरोधाभास को भी महत्वपूर्ण माना. जांच अधिकारी के अनुसार बरामद कंटेनर खाली था, जबकि फॉरेंसिक रिपोर्ट में उसमें करीब 4 ml insecticide मौजूद होने की बात दर्ज थी. कोर्ट ने इस अंतर को भी अभियोजन के मामले की विश्वसनीयता पर असर डालने वाली परिस्थिति माना.
घायल गवाह की गवाही महत्वपूर्ण, लेकिन जांच से परे नहीं
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी घायल व्यक्ति की गवाही को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है. हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि ऐसी गवाही न्यायिक जांच से पूरी तरह मुक्त हो जाती है.
- अदालत के अनुसार घायल गवाह के बयान को मामले की दूसरी परिस्थितियों, मेडिकल रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ मिलाकर देखा जाना जरूरी है.
- इस मामले में पत्नी के बयान में वैवाहिक विवाद से जुड़े कुछ पहलुओं को लेकर असंगतियां भी सामने आईं. इसलिए कोर्ट ने कहा कि उसके बयान का मूल्यांकन अधिक सावधानी से किया जाना जरूरी था.
घटना के बाद पति के व्यवहार को भी कोर्ट ने माना महत्वपूर्ण
हाईकोर्ट ने आरोपी के घटना के बाद के व्यवहार पर भी गौर किया. कोर्ट के अनुसार पत्नी को तुरंत अस्पताल ले जाया गया और उसके इलाज की व्यवस्था की गई.
अदालत ने कहा कि आरोपी का घटना के बाद का आचरण भी यह तय करने में प्रासंगिक परिस्थिति हो सकता है कि क्या उसके भीतर Section 307 IPC के तहत आवश्यक हत्या की नीयत या ज्ञान मौजूद था.
शादी के रिश्ते पर हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव ने कहा कि शादी का रिश्ता faith, companionship और trust पर आधारित होता है. लेकिन अगर वैवाहिक विवादों को समय रहते और सावधानी से नहीं सुलझाया जाए, तो रिश्ते की दिशा पूरी तरह बदल सकती है.
- कोर्ट ने कहा कि जीवन में कई तरह के दर्द समय के साथ ठीक हो सकते हैं, लेकिन रिश्तों में पैदा हुए विवादों को सुलझाने में देरी कई बार समस्या को कम करने के बजाय और बढ़ा सकती है.
- अदालत ने इस मामले को ऐसे दंपती के उदाहरण के तौर पर देखा, जो शादी के करीब एक साल के भीतर ही गंभीर विवाद में फंस गए और एक-दूसरे के खिलाफ “loggerheads” की स्थिति में पहुंच गए.
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