Defense: आखिरकार 6 दशक की सेवा के बाद वायु सेना से रिटायर हुआ मिग-21

शुक्रवार को मिग-21 ने अंतिम उड़ान भरी. विदाई समारोह में वायुसेना प्रमुख एपी सिंह मिग-21 के अंतिम उड़ान का नेतृत्व किया. विदाई समारोह के दौरान हवाई करतब दिखाए गए. वायु योद्धा ड्रिल टीम ने सटीक प्रस्तुतियों के साथ हवाई सलामी दी और 23वें स्क्वाड्रन के मिग-21 जेट विमानों के साथ जगुआर और तेजस विमानों ने भी फ्लाईपास्ट में हिस्सा लिया.

Defense: लगभग 6 दशक तक देश की सुरक्षा में तैनात रहा मिग-21 आखिरकार सेवा से रिटायर से हो गया. शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में मिग-21 ने अंतिम उड़ान भरी. विदाई समारोह में वायुसेना प्रमुख एपी सिंह मिग-21 में अंतिम उड़ान का नेतृत्व किया. इस दौरान हवाई करतब दिखाए गए. वायुसेना की ‘आकाश गंगा’ स्काईडाइविंग टीम ने शानदार प्रदर्शन किया. मिग-21 के तीन विमानों ने ‘बादल’ फॉर्मेशन में और चार विमानों ने ‘पैंथर’ फॉर्मेशन में अंतिम उड़ान भरी. सूर्य किरण एरोबैटिक टीम ने हैरतअंगेज करतबों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. वायु योद्धा ड्रिल टीम ने सटीक प्रस्तुतियों के साथ हवाई सलामी दी और 23वें स्क्वाड्रन के मिग-21 जेट विमानों के साथ जगुआर और तेजस विमानों ने भी फ्लाईपास्ट में हिस्सा लिया. 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने में मिग-21 की विरासत का अहम योगदान है. मिग-21 सिर्फ एक लड़ाकू विमान नहीं बल्कि साहस, अनुशासन और देशभक्ति का प्रतीक है. यह स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस और एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के निर्माण के लिए प्रेरणा देता रहेगा. उन्होंने कहा कि जब दुनिया आने वाले समय में भारत को देखेगी तो पता चलेगा कि वायुसेना ने मिग-21 से शुरुआत कर भविष्य के उपकरण बनाने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है. मिग-21 सिर्फ एक मशीन नहीं बल्कि भारत का सैन्य एविएशन में उभार का प्रतीक है. रक्षा मंत्री ने कहा कि लगभग 11500 मिग-21 का निर्माण हुआ है भारतीय वायुसेना में 850 ऐसे विमान शामिल रहे. इतनी बड़ी संख्या में किसी भी लड़ाकू विमान का उत्पादन नहीं हुआ, इससे इस विमान की क्षमता का पता चलता है. 


कई युद्ध में मिग-21 का रहा है अहम रोल


मिग-21 कई युद्धों में अहम रोल अदा किया है. यह विमान इंटरसेप्टर, दुश्मन के विमानों को रोकने, पायलटों की ट्रेनिंग सहित कई रोल निभा चुका है. इस विमान का प्रदर्शन उम्मीद से अधिक रहा. लगभग 1950 के दशक में बने इस विमान को कई बार अपग्रेड किया गया और इसे त्रिशूल, विक्रम, बादल और बिसेन नाम से जाना गया. भारतीय वायुसेना में मिग-21 को वर्ष 1960 में शामिल किया गया और इसे काफी पहले सेवा से बाहर हो जाना चाहिए. एक लड़ाकू विमान सेवा में 40 साल तक रह सकता है. लेकिन मिग-21 को लगातार अपग्रेड किया गया और इसमें आधुनिक रडार सिस्टम, एवियोनिक्स और वेपन सिस्टम लगाया गया. इस काम को एचएएल ने बखूबी अंजाम दिया. इसलिए यह विमान हमेशा युद्ध के लिए तैयार रहा.


 रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्ष 1971 के युद्ध में कठिन मौसम में मिग-21 में ढाका के गवर्नर हाउस पर हमला कर भारत की जीत सुनिश्चित करने का काम किया. इसके अलावा कारगिल युद्ध, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर में भी मिग-21 का अहम रोल रहा. हर ऐतिहासिक मिशन में मिग-21 ने भारत के तिरंगे की शान को बरकरार रखा. कई दशक तक भारत की वायु शक्ति का प्रमुख स्तंभ बना रहा. कार्यक्रम के दौरान पूर्व वायुसेना प्रमुख एवाई टिपनिस, एसपी त्यागी और बीएस धनोआ के साथ-साथ ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला मौजूद रहे.  

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