Cyber Security: आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, फ्रंटलाइन वर्कर्स को भी दी जाएगी ट्रेनिंग

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा शासन प्रणालियों में डिजिटल लचीलापन और डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें तय किया गया कि डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में साइबर सुरक्षा अभ्यास फ्रंटलाइन श्रमिकों, आंगनवाड़ी कर्मचारियों और राज्य-स्तरीय हितधारकों तक पहुंचाया जाएगा, जो देश में सेवा वितरण नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण हैं.

Cyber Security: हम ऐसे समय में रह रहे हैं, जहां पर हमारा काम डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है.आज के समय में डिजिटल प्लेटफार्म का उपयोग किये बिना कोई भी काम कठिन है. हालांकि डिजिटल प्लेटफार्म का उपयोग के साथ ही साइबर सुरक्षा की जानकारी होना बेहद जरूरी महसूस किया जा रहा है. संवेदनशील डेटा को संभालने वाले व्यक्ति, सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए सतर्कता और ज्यादा बढ़ जाती है.

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने शुक्रवार को “साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यशाला” का आयोजन किया. इसमें ऑनलाइन सुरक्षा, साइबर खतरों और सुरक्षित इंटरनेट के बारे में जागरूकता फैलाने पर ध्यान केंद्रित किया गया. खासकर महिलाओं और बच्चों के लिए, जो राष्ट्र निर्माण के केंद्र में हैं. यह कार्यशाला एक बड़ी पहल का पहला चरण है. अगले चरण में साइबर जागरूकता और डिजिटल सुरक्षा अभ्यास फ्रंट लाइन श्रमिकों,आंगनवाड़ी कर्मचारियों और राज्य-स्तरीय हितधारकों तक ले जाया जायेगा जो मंत्रालय के सेवा वितरण नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण हैं.

सतर्कता और जिम्मेवारी पर आधारित है साइबर सुरक्षा

कार्यशाला में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया, जिसमें राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्लू), सावित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला और बाल विकास संस्थान, केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) जैसे इसके सहायक और स्वायत्त निकाय शामिल थे. डिजिटल खतरों से निपटने के लिए 360 डिग्री दृष्टिकोण लेने के लिए सरकार और उद्योग के शीर्ष साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ भी इस कार्यशाला में उपस्थित रहे. भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4सी), गृह मंत्रालय के विशेषज्ञों ने साइबर अपराध की बढ़ती जटिलता और सतर्कता को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया. 

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय नोडल एजेंसी CERT-In (भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम) ने साइबर सुरक्षा, नीति और डेटा संरक्षण पर अपने विचार रखे. पीडब्ल्यूसी इंडिया ने वास्तविक दुनिया के हैक को बताते हुए डिजिटल लचीलापन अनिवार्य क्यों और फिशिंग से पोर्टल सुरक्षा तक के बारीकियों पर विस्तार से बताया. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव अनिल मलिक ने कहा कि हम ऐसे समय में रह रहे हैं जब हमारा काम और संचार डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है. संवेदनशील डेटा को संभालने वाले सरकारी अधिकारियों के रूप में, यह आवश्यक है कि हम सतर्क और जानकार रहे. 

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