साइबर अपराध अब बना ‘सर्विस’! पैसे लेकर ठगी में मदद करता है नेटवर्क, ऐसे रहें सावधान

एक बड़े 'बॉस स्कैम' की जांच से साइबर अपराध के नए मॉडल 'साइबर क्राइम-एज-ए-सर्विस' का खुलासा हुआ है. इस मॉडल में अपराधी दूसरों को ठगी के लिए तकनीकी सहायता बेचते हैं. जानिए यह कैसे काम करता है और खुद को कैसे बचाएं.

अहमदाबाद में 1.5 करोड़ रुपये के ‘बॉस स्कैम’ की जांच में साइबर अपराध के एक ऐसे तरीके का पता चला है, जिसमें अपराधियों को ठगी के लिए जरूरी तकनीकी मदद और डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं. पुलिस ने इसे ‘साइबर क्राइम-एज-ए-सर्विस’ मॉडल से जोड़ा है. इसका मतलब है कि साइबर अपराध करने वाले कुछ लोग खुद ठगी करने के बजाय दूसरे अपराधियों को तकनीकी सहायता देते हैं.

ठगी के लिए देते हैं डिजिटल संसाधन

पुलिस के मुताबिक, ऐसे नेटवर्क में अलग-अलग लोग अलग-अलग काम करते हैं. कोई सिम कार्ड या डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराता है, तो कोई ओटीपी से जुड़ी सहायता देता है. इसके बाद दूसरे लोग इनका इस्तेमाल करके पीड़ितों को निशाना बनाते हैं.

अहमदाबाद मामले की जांच में करीब 4,500 सिम कार्ड के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है. आरोपियों के पास से आठ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी मिले, जिनमें एक डिवाइस एक साथ 4 सिम कार्ड चला सकता था.

WhatsApp ग्रुप के जरिए भी मदद

पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क से जुड़े WhatsApp ग्रुप्स के जरिए दूसरे साइबर अपराधियों को ओटीपी से जुड़ी सहायता और अन्य डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराई जाती थीं. इससे ठगी की प्रक्रिया में कई अलग-अलग लोग शामिल हो सकते हैं.

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एक ठगी से खुला नेटवर्क

यह जांच जून में हुए 1.5 करोड़ रुपये के ‘बॉस स्कैम’ के बाद शुरू हुई थी. जालसाजों ने कंपनी के एक कर्मचारी को उसके वरिष्ठ अधिकारी बनकर संपर्क कियाऔर पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा था. हालांकि शिकायत के बाद पुलिस ने करीब 1.3 करोड़ रुपये बरामद कर पीड़ित को वापस किए.

जांच में दो लोगों की गिरफ्तारी हुई और आरोपियों से जुड़े मोबाइल नंबरों के खिलाफ साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर पहले से 251 शिकायतें दर्ज होने की जानकारी सामने आई.

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लोगों को क्यों रहना चाहिए सतर्क?

‘साइबर क्राइम-एज-ए-सर्विस’ जैसे नेटवर्क की वजह से ठग अलग-अलग तकनीकी साधनों का इस्तेमाल करके लोगों को निशाना बना सकते हैं. इसलिए किसी अनजान नंबर से आए OTP, बैंक ट्रांसफर, UPI भुगतान या तत्काल पैसे भेजने के अनुरोध पर भरोसा न करें. क्योंकि इस ठगी में आरोपियों ने खुद को कंपनी के बॉस बनकर कर्मचारी को झांसे में लिया.

इसलिए अगर कोई व्यक्ति खुद को बॉस, अधिकारी या किसी परिचित के रूप में बताकर तुरंत पैसे भेजने को कहे, तो पहले उसके ओरिजनल नंबर पर सीधे संपर्क करके पुष्टि करें.



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लेखक के बारे में

By दीपक कुमार गुप्ता

दीपक कुमार गुप्ता 'प्रभात खबर डिजिटल' में कंटेंट राइटर हैं. इससे पहले वे 'ईटीवी भारत' में करीब ढाई साल तक कार्यरत रहे. इन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पत्रकारिता की पढ़ाई की है. 2021 से वे पत्रकारिता से जुड़े हैं और इस दौरान 'न्यूज प्लस', 'अंतर्कथा विजन न्यूज' और 'पब्लिक ऐप' के साथ भी काम कर चुके हैं.

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