Cyber crime: डिजिटल अरेस्ट से निपटने के लिए केंद्र ने गठित की है उच्च-स्तरीय समिति
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में केंद्र सरकार की ओर कहा गया है कि गृह मंत्रालय ने विशेष सचिव(आंतरिक सुरक्षा) के नेतृत्व में डिजिटल अरेस्ट से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल के लिए एक उच्च-स्तरीय अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया है. गठन के बाद से इस समिति की कई बैठकें हो चुकी है. इससे निपटने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम और रिजर्व बैंक की ओर से भी सुझाव मिले हैं.
Cyber crime: देश में डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार सक्रिय हो गयी है. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में केंद्र सरकार की ओर कहा गया कि गृह मंत्रालय ने विशेष सचिव(आंतरिक सुरक्षा) के नेतृत्व में डिजिटल अरेस्ट से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल के लिए एक उच्च-स्तरीय अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया है. गठन के बाद से इस समिति की कई बैठकें हो चुकी है.
हाल में हुई बैठक में गूगल, व्हाट्सएप, टेलीग्राम और अन्य हितधारकों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे. सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट के मामलों से निपटने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम और रिजर्व बैंक की ओर से भी सुझाव मिले हैं. इस उच्च-स्तरीय समिति का गठन 26 दिसंबर 2025 को किया गया है और इसमें विभिन्न एजेंसियों के अधिकारियों को शामिल किया गया है. यह समिति डिजिटल अरेस्ट के सभी पहलुओं की व्यापक समीक्षा करेगी.
साथ ही केंद्र सरकार ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट से जुड़े सभी मामलों की जांच अब सीबीआई करेगी. गौरतलब है कि एक दिसंबर 2025 को हुई सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने सीबीआई को डिजिटल अरेस्ट से जुड़े लोगों और संगठनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया था. साथ ही अदालत ने इस मामले में फर्जी खाता खोलने वाले बैंक अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करने का निर्देश दिया था.
उच्च-स्तरीय समिति में कौन-कौन है शामिल
गृह मंत्रालय की ओर से डिजिटल अरेस्ट से निपटने के लिए एक उच्च स्तरीय 13 सदस्यीय समिति बनायी गयी है. यह समिति डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल और ऑनलाइन ठगी से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी. इस समिति में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, दूरसंचार मंत्रालय, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, विदेश मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग, कानून और न्याय मंत्रालय, उपभोक्ता मामले मंत्रालय, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), दिल्ली पुलिस के आईजी रैंक के अधिकारी और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर के सदस्य सचिव शामिल हैं.
सरकार ने अदालत से रिपोर्ट दाखिल करने के लिए एक महीने का समय मांगा है. अगली सुनवाई में केंद्र सरकार इस समिति की रिपोर्ट के आधार पर डिजिटल अरेस्ट के मामले से निपटने के लिए व्यापक कार्य योजना पेश करेगी. गौरतलब है कि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने सरकार से डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन करने का सुझाव दिया था. एक अनुमान के अनुसार डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बुजुर्गों से सैकड़ों करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आ चुका है. सरकार के तमाम प्रयास के बावजूद डिजिटल अरेस्ट के मामले लगातार सामने आ रहे हैं.
