Cooperative: कोऑपरेटिव से जुड़ेंगे दूध उत्पादन करने वाले

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के अवसर पर सहकारिता क्षेत्र से जुड़ी कार्यकर्ताओं के साथ ‘सहकार संवाद’ में गरीबों, किसानों और ग्रामीणों के जीवन में किस तरह से बदलाव आ रहा है इस पर विस्तार से प्रकाश डाला.

Cooperative: आगामी कुछ वर्षों में ऐसी व्यवस्था की जाएगी जिससे गांव में दूध उत्पादन का काम करने वाले 500 परिवारों में से 400 परिवार कोऑपरेटिव से जुड़े होंगे. उनके पशु के गोबर का काम भी कोऑपरेटिव को दे दिया जाएगा. आगामी 6 माह में यह सारी योजनाएं ठोस रूप लेकर सहकारी संस्थाओं तक पहुंच जाएंगी. इसी के तहत पैक्स को सीएससी, माइक्रो एटीएम, हर घर नल, बैंक मित्र सहित लगभग 25 अन्य गतिविधियों से जोड़ा गया है.

सरकार डेयरी के क्षेत्र बहुत सारा परिवर्तन ला रही है. सरकार की कोशिश है कि आने वाले समय में सहकारी डेयरियों में गोबर के प्रबंधन, पशुओं के खानपान और स्वास्थ्य के प्रबंधन और गोबर के उपयोग से कमाई बढ़ाने के उपायों पर ध्यान केंद्रित किया जाये. इस दिशा में देश भर में अभी छोटे-छोटे बहुत प्रयोग हुए हैं. सभी प्रयोगों का संकलन कर उनके परिणाम हर सहकारी संस्था तक पहुंचाने के प्रयास हो रहे हैं और केंद्र सरकार इसके लिए योजना बना रही है.

सहकारिता क्षेत्र में युवा पेशेवर की जरूरत

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के तहत आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों के अंतर्गत गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान की सहकारिता क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं व अन्य कार्यकर्ताओं के साथ ‘सहकार संवाद’ को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय ने प्राकृतिक खेती के जरिए उपजे अनाज की खरीद के लिए राष्ट्रीय स्तर की सहकारी संस्था बनाई है. इसके अलावा, किसानों की फसल के निर्यात के लिए भी सहकारी संस्था बनाई है और निर्यात से होने वाले मुनाफे की रकम सीधा किसान के बैंक खाते में भेजने की व्यवस्था की गई है. त्रिभुवनदास पटेल के नाम पर आणंद जिले में त्रिभुवन सहकारिता यूनिवर्सिटी का शिलान्यास हुआ है. सहकारिता क्षेत्र में युवा पेशेवर तैयार करने का मूल विचार त्रिभुवनदास जी का था और इसी उद्देश्य से इस यूनिवर्सिटी की स्थापना की जा रही है. 

वैज्ञानिक प्रयोग है प्राकृतिक खेती

अमित शाह ने कहा कि वह जब रिटायर होंगे तो वेद, उपनिषद और प्राकृतिक खेती में अपना समय व्यतीत करेंगे. प्राकृतिक खेती एक वैज्ञानिक प्रयोग है जो कई प्रकार के फायदे देता है.फर्टिलाइजर वाला गेहूं खाने से बीपी बढ़ता है, डायबिटीज होती है, थायराइड की प्रॉब्लम आती है. लेकिन फर्टिलाइजर और केमिकल रहित खाना खाने से दवाइयों की जरूरत ही नहीं पड़ेगी. इसके अलावा, प्राकृतिक खेती से उत्पादन बढ़ता है. उन्होंने अपने खेतों में प्राकृतिक खेती अपनाई है और उत्पादन में लगभग डेढ़ गुना बढ़ोतरी देखी है. उन्होंने कहा कि यूरिया, डीएपी और एमपीके के बड़े-बड़े कारखाने हैं, लेकिन प्राकृतिक खेती की जाए तो केचुआ ही यूरिया, डीएपी और एमपीके का काम करता है. केंचुआ मिट्टी खाता है और खाद बनाकर बाहर निकालता है. प्राकृतिक खेती करने से धरती का नुकसान नहीं होता, पानी का भी बचाव होता है और लोगों की सेहत भी अच्छी रहती है.

पैक्स से राजस्व की भी प्राप्ति होनी चाहिए. जन औषधि केन्द्र की सेवाएं दे रहे पैक्स को गांव में लोगों को इस बारे में पर्याप्त जागरूकता पैदा करनी चाहिए कि उनके केंद्र में बाजार दर की तुलना में काफी किफायती दवाएं उपलब्ध हैं. केन्द्रीय गृह एवं अमित शाह ने कहा कि देश का गृह मंत्री होना बहुत बड़ी बात होती है, क्योंकि सरदार पटेल साहब भी गृह मंत्री थे. लेकिन जिस दिन उन्हें सहकारिता मंत्री बनाया गया, वह मानते हैं कि उस दिन गृह मंत्रालय से भी बड़ा डिपार्टमेंट उन्हें मिल गया. यह ऐसा मंत्रालय है जो देश के गरीबों, किसानों, गांवों और पशुओं के लिए काम करता है.

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Published by: Anjani kumar singh

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