न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की पहल पर, सभी राजनीतिक दलों के फ्लोर लीडर्स मंगलवार, 28 जुलाई को लोकसभा में 'सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा करने के लिए सहमत हो गए. कांग्रेस चर्चा में हिस्सा लेगी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस बिल पर बोलेंगे; कांग्रेस की तरफ से प्रियंका गांधी वाड्रा भी बोल सकती हैं. हालांकि, विपक्ष की अंतिम रणनीति मंगलवार सुबह संसद में होने वाली विपक्षी फ्लोर लीडर्स की बैठक में तय की जाएगी.
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में विपक्ष ने सदन में किया हंगामा
NEET पेपर लीक के विरोध में हो रहे छात्र प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद के दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष का भारी हंगामा जारी है. लगातार बढ़ते हंगामे के कारण सोमवार को राज्यसभा की कार्यवाही चार बार स्थगित करनी पड़ी और आखिरकार शाम 5:15 बजे इसे मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया. वहीं, लोकसभा में भी विपक्ष के विरोध के चलते कार्यवाही को मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया.
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर लगाया सदन न चलने देने का आरोप
'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर बोलते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, "सभी सदस्य तैयारी के साथ आए हैं और विपक्ष के कई सदस्यों ने भी संशोधन पेश किए हैं; वे भी पूरी तरह तैयार हैं. यह एक महत्वपूर्ण विधेयक है, जो बच्चों, युवाओं और छात्रों के जीवन के लिए बहुत जरूरी है. फिर भी, कांग्रेस पार्टी और उसके कुछ सहयोगी दल जानबूझकर इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा में बाधा डाल रहे हैं. शुरू में वे इस बात पर जोर दे रहे थे कि चर्चा होनी चाहिए, क्योंकि यह मामला परीक्षाओं और बच्चों के कल्याण से जुड़ा है. अब जब चर्चा के लिए इतना महत्वपूर्ण विधेयक लाया गया है और इसके लिए समय भी तय किया गया है, तब भी वे ऐसा ही व्यवहार कर रहे हैं. मैं कांग्रेस पार्टी के अपने सहयोगियों से आग्रह करता हूं: कृपया ऐसा न करें. आपकी छवि पहले ही काफी खराब हो चुकी है; ऐसे काम न करें जिनसे आपकी पार्टी की और बदनामी हो. पूरी पार्टी को एकजुट होकर इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा में भाग लेना चाहिए, जिसका उद्देश्य हमारे युवाओं और छात्रों के जीवन को बेहतर बनाना है."
एंटी पेपर लीक बिल की खास बातें
- व्यक्तिगत अपराध पर सजा: पेपर लीक या नकल करने वाले व्यक्तियों को 5 से 10 साल की जेल और 50 लाख तक का जुर्माना.
- संगठित अपराध पर कड़ा रुख: गिरोह या संगठित अपराध में शामिल लोगों को कम से कम 7 साल की जेल और 10 करोड़ तक का जुर्माना.
- त्वरित जांच: सभी मामलों की जांच 2 महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा.
- फास्ट-ट्रैक कोर्ट: राज्य और केंद्र शासित प्रदेश फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाएंगे, जो चार्जशीट के 3 महीने के भीतर मुकदमे का फैसला करेंगी.
