कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पीएम मोदी पर किया अटैक- वे इजरायल के अंधभक्त हैं, उन्हें सिर्फ मोदानी साम्राज्य की चिंता

Jairam Ramesh : कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एकबार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है और उन्हें इजरायल का अंधभक्त बताया है. इससे पहले 18 जून को उन्हें पीएम मोदी और अमित शाह पर हमला करते हुए उन्हें शिवसेना में हुई फूट की वजह बताया था.

Jairam Ramesh : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला किया है और कहा कि उनके द्वारा इजरायल के प्रति अंधभक्ति रखने की वजह से भारत के हितों का नुकसान हो रहा है.

ईरान-अमेरिका समझौते के लिए खतरा है इजरायल

जयराम रमेश ने कहा कि ईरान-अमेरिका समझौते का पूरी दुनिया में स्वागत किया जा रहा है. यह समझौता विश्व को कई तरह की परेशानियों से बचाएगा, लेकिन इस समझौते को इजरायल से सबसे बड़ा खतरा है, क्योंकि इजरायल लेबनान पर हमला करना बंद नहीं कर रहा है. पश्चिम एशिया में अशांति से पूरे विश्व में अव्यवस्था आ गई है.

समझौते के बाद भी इजरायल ने लेबनान को दी धमकी

जयराम रमेश ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री जैसे शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति ने अभी-अभी पूरे लेबनान को जलाने की बात कही है. उनके इस बयान की पूरे विश्व में निंदा हुई, लेकिन हमेशा की तरह मोदी सरकार पूरी तरह चुप है.प्रधानमंत्री की इजराइल के प्रति यही अंधभक्ति हमारे देश के हितों को नुकसान पहुंचा रही है. उन्हें सिर्फ इस बात की चिंता है कि बस किसी तरह मोदानी साम्राज्य के हित सुरक्षित रह जाएं.

17 जून को समझौते पर हुए हस्ताक्षर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने पश्चिम एशिया में शांति के लिए एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए. इस समझौते के तहत सभी सैन्य गतिविधियों को तुरंत रोकने, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी हटाने पर सहमति बनी है. हालांकि समझौते के बाद इजरायल ने लेबनान पर हमला किया, जिसमें 5 लोगों की मौत हुई. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जब इस बारे में एक इंटरव्यू के दौरान पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि नेतन्याहू को थोड़ी समझदारी रखनी होगी. वैसे वे वही करते हैं, जो मैं उन्हें कहता हूं. वे मेरी बहुत इज्जत करते हैं, इसलिए मैं चीजों को नियंत्रित कर सकता हूं.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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