Congress: आप की राजनीति ने कांग्रेस को आक्रामक अभियान चलाने को किया मजबूर

चुनाव प्रचार से कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की दूरी से लग रहा था कि कांग्रेस आम आदमी पार्टी के खिलाफ आक्रामक प्रचार अभियान से दूर रहेगी. लेकिन, आप द्वारा सोशल मीडिया पर भ्रष्ट नेताओं की सूची में राहुल गांधी को भी शामिल करने के बाद कांग्रेस ने आप के खिलाफ आक्रामक अभियान चलाने का फैसला किया.

Congress:  दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के मिलकर लड़ने की संभावना थी. हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन को मिली हार के बाद दोनों दलों के बीच गठबंधन की चर्चा हो रही थी. लेकिन आम आदमी पार्टी ने सत्ता विरोधी लहर को कम करने के लिए दिल्ली में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला लिया. आप का आकलन था कि कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ने में सत्ता विरोधी वोट का ट्रांसफर सीधे भाजपा को होगा, जबकि अकेले चुनाव लड़ने पर यह वोट भाजपा और कांग्रेस में बंट जायेगा, जिससे आम आदमी पार्टी काे नुकसान कम होगा. आम आदमी पार्टी को उम्मीद थी कि दिल्ली चुनाव कांग्रेस सिर्फ अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए लड़ेगी. हालांकि कांग्रेस की ओर से जारी उम्मीदवारों की सूची के बाद आम आदमी पार्टी को झटका लगा.

कांग्रेस पर दबाव बनाने की रणनीति

आम आदमी पार्टी की ओर से कांग्रेस पर दबाव बनाने के लिए इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों का साथ हासिल करने का काम किया गया और कांग्रेस को इंडिया गठबंधन से बाहर करने की बात कही. आम आदमी पार्टी को लगा कि इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों के दबाव में कांग्रेस बैकफुट पर चली जायेगी. शुरू में आम आदमी पार्टी की रणनीति सफल होती भी दिखी. कांग्रेस ने कोषाध्यक्ष अजय माकन के प्रेस कांफ्रेंस पर रोक लगा दी और स्वास्थ्य कारणों के कारण राहुल गांधी की कई रैलियों को रद्द कर दिया गया. ऐसा लगा कि दिल्ली चुनाव में कांग्रेस और आप के बीच सियासी खिचड़ी पक रही है. लेकिन आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया पर जारी भ्रष्ट नेताओं की सूची में राहुल गांधी को शामिल करने के बाद कांग्रेस आक्रामक हो गयी. पार्टी का शीर्ष नेतृत्व चुनाव में आम आदमी पार्टी के खिलाफ मैदान में उतर गया. राहुल गांधी ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अरविंद केजरीवाल पर करारा प्रहार कर साफ कर दिया कि कांग्रेस मजबूती से दिल्ली चुनाव लड़ रही है. 

कांग्रेस की आक्रामकता से भाजपा उत्साहित


चुनाव प्रचार से कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की दूरी से ऐसा लग रहा था कि कांग्रेस आम आदमी पार्टी के खिलाफ आक्रामक प्रचार से दूर रहेगी. लेकिन आप नेताओं के बयान और सोशल मीडिया पर भ्रष्ट नेताओं की सूची में राहुल गांधी को शामिल करने के बाद कांग्रेस ने आप के खिलाफ आक्रामक अभियान चलाने का फैसला किया. शुरू में कांग्रेस इंडिया गठबंधन के तहत आम आदमी पार्टी को लेकर नरम रवैया अपनाने की रणनीति पर काम रही थी. क्योंकि कांग्रेस का मानना था कि भाजपा को हराने के लिए आप और तृणमूल कांग्रेस का सहयोग जरूरी है. इसे ध्यान में रखते हुए लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के साथ विरोध के बावजूद गठबंधन किया गया. कांग्रेस के कई नेताओं ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी आप के साथ गठबंधन करने पर जोर दिया और गठबंधन नहीं होने की स्थिति में आप के खिलाफ आक्रामक अभियान नहीं चलाने की बात कही. 

आप के रहते दिल्ली में कांग्रेस का मजबूत होना मुश्किल

यही कारण रहा कि सीलमपुर में हुई रैली में राहुल गांधी केजरीवाल की बजाय भाजपा पर आक्रामक दिखे. लेकिन राहुल की रैली को लेकर अरविंद केजरीवाल का यह कहना, ‘कांग्रेस खुद को बचाने के लिए चुनाव लड़ रही है’ जबकि, ‘आम आदमी पार्टी देश बचाने के लिए’. कांग्रेस के नेताओं को नागवार गुजरा. कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी को यह बताया कि आम आदमी भाजपा की बजाय कांग्रेस का नुकसान कर रही है. इसके बावजूद राहुल आप के खिलाफ आक्रामक नहीं होना चाहते थे. लेकिन स्थानीय उम्मीदवारों ने कांग्रेस आलाकमान को यह संदेश दिया कि अगर केजरीवाल के खिलाफ पार्टी आक्रामक नहीं होगी तो उनके चुनाव लड़ने का कोई फायदा नहीं है. इसके बाद कांग्रेस आलाकमान ने आप सरकार के खिलाफ आक्रामक प्रचार करने का फैसला किया. पार्टी का मानना है कि आप के रहते कांग्रेस दिल्ली और पंजाब में मजबूत नहीं हो सकती है. कांग्रेस की इस आक्रामकता से भाजपा उत्साहित है. 

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