अभिजीत दीपके ने धर्मेंद्र प्रधान को दिया अल्टीमेटम- 7 दिनों के अंदर इस्तीफा दें, आपने अभी ट्रेलर देखा है...

Cockroach Janta Party : अभिजीत दीपके यह नाम इन दिनों काफी चर्चा में है और दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद इनका उत्साह भी बढ़ा हुआ है. अब अभिजीत दीपके धर्मेंद्र प्रधान को अल्टीमेटम दे रहे हैं कि वे 7 दिनों के अंदर इस्तीफा दें.

Cockroach Janta Party : कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने रविवार को कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा. दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन के बाद अभिजीत दीपके अपने माता-पिता से मिलने महाराष्ट्र गए हैं. यहां उन्होंने छत्रपति संभाजीनगर में कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर हमारा विरोध प्रदर्शन काफी हद तक सफल रहा. इस प्रदर्शन में लगभग 7,000 लोग शामिल हुए.

अभिजीत दीपके ने धर्मेंद्र प्रधान को दिया 7 दिनों का अल्टीमेटम

अभिजीत दीपके ने लिखा है कि धर्मेंद्र प्रधान ने पूरी एक पीढ़ी के साथ गलत किया है. अगर उन्हें अगले 7 दिनों में हटाया नहीं गया या वे पद नहीं छोड़ते हैं, तो हमें जमीन पर अपना प्रोटेस्ट जारी रखने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. मैं आज बाद में आप सभी को इंस्टाग्राम लाइव पर संबोधित करूंगा. मैं अपने माता-पिता से मिलने घर जा रहा हूं, उनसे आखिरी बार मिले हुए एक साल से ज्यादा हो गया है. पिछले 15 दिनों में उन्हें बहुत तकलीफ हुई है और धमकियों की वजह से उन्हें घर छोड़ना पड़ा. उन्हें वापस घर ले आऊंगा.

अभिजीत दीपके ने प्रोटेस्टे में शामिल होने वालों का शुक्रिया अदा किया. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा-मैं आप में से हर एक को धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने गर्मी की तपती धूप का सामना किया, जिसमें छोटे बच्चे और स्टूडेंट्स भी शामिल थे. आपने यह साबित किया कि शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट हमारी सबसे बड़ी ताकत है. सरकार एक साथ, शांतिपूर्ण आंदोलन को छू नहीं सकती. हम कॉकरोचों को उनसे कभी डरने की जरूरत नहीं है.

ट्रेलर था जंतर-मंतर का प्रदर्शन

अभिजीत दीपके ने अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि शनिवार को जंतर-मंतर पर हमने इतिहास रच दिया है. यहां हजारों लोग हमारे प्रदर्शन को समर्थन देने पहुंचे थे. जंतर-मंतर पर हमारे शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट ने सरकार को दिखा दिया कि जब हम एक साथ होते हैं तो कॉकरोच क्या कर सकते हैं. जंतर पर हमसे जुड़ने वाले ज्यादातर लोगों ने पहले कभी किसी प्रोटेस्ट में हिस्सा नहीं लिया था. लेकिन हमारी एक साथ मौजूदगी से उन्हें एजुकेशन सिस्टम के प्रति अपना गुस्सा और निराशा जाहिर करने की हिम्मत मिली. अगर हम अपनी आवाज नहीं उठाएंगे तो बदलाव नहीं हो सकता.

ये भी पढ़ें : कहां हैं कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के माता-पिता?

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >