सौरव दास ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा 18 वर्ष से कम उम्र के बेकसूर छात्रों को रिहा करने के आदेश का स्वागत किया. उन्होंने कहा, "हम लंबे समय से जमीनी स्तर पर संघर्ष कर रहे हैं. हमारी सबसे प्रमुख मांग यह है कि आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर (FIR) तुरंत वापस ली जाए और सरकार भविष्य में किसी भी प्रदर्शनकारी पर कोई दंडात्मक या जवाबी कार्रवाई न करने का लिखित आश्वासन दे."
CJP ने एफआईआर वापसी के लिए मंगलवार तक का समय तय किया था
CJP ने एफआईआर वापसी के लिए मंगलवार तक का समय तय किया था. प्रवक्ता ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार अपनी बात से पीछे हटती है, तो देश का युवा एक बार फिर दिल्ली की सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होगा.
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी और निर्देश
मामले की सुनवाई कर रहे भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने राज्यों को निर्देश दिया है कि बिना किसी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 18 साल से कम उम्र के नाबालिगों को तुरंत रिहा किया जाए. अदालत ने यह भी आदेश दिया कि किसी भी छात्र पर फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए और विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए.
कंगना रनौत के बयान पर पलटवार
छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर बीजेपी सांसद कंगना रनौत की विवादास्पद टिप्पणियों पर सौरव दास ने कहा, "खुद उनकी पार्टी के लोग उन्हें गंभीरता से नहीं लेते, तो हम या देश की नई पीढ़ी उन्हें क्यों सुनें? हिमाचल में अपने संसदीय क्षेत्र के दौरे के दौरान उन्होंने खुद कहा था कि उन्हें लगा था कि सांसद का काम आसान होगा, लेकिन इसमें बहुत मेहनत है. उनका यह बयान ही उनकी गंभीरता को दर्शाने के लिए काफी है." बता दें कि कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारी छात्रों की भाषा और शैली की आलोचना करते हुए वीडियो को 'उल्टी आने जैसा' बताया था.
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