Chenab Bridge: घोड़ों और खच्चरों से ढलानों को किया गया पार, चिनाब पुल को बनाना नहीं था आसान

Chenab Bridge: चिनाब पुल को लेकर कई चुनौतियों का सामना किया गया. परियोजना पर काम कर रही टीम ने घोड़ों और खच्चरों से ढलानों को पार किया. प्रधानमंत्री मोदी ने चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल का शुक्रवार को उद्घाटन किया. यह पुल आठ साल से अधिक समय में 1,486 करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार हुआ है.

Chenab Bridge: कश्मीर से कन्याकुमारी तक रेल यात्रा के सपने को साकार करने के लिए चिनाब ब्रिज का निर्माण एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसके पीछे परियोजना टीम को कई कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा. हिमालय की दुर्गम ढलानों से घिरे स्थान तक पहुंचना बेहद मुश्किल था, जहां तक पहुंचने के लिए केवल घोड़े और खच्चर का ही सहारा लिया जा सकता था. एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के अनुसार, सबसे बड़ी शुरुआती चुनौती निर्माण स्थल तक पहुंचने और आवश्यक सामग्री वहां तक लाने की थी. विषम परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद यह अद्भुत कार्य पूरा किया गया.

जम्मू और कश्मीर में चेनाब रेल पुल की तस्वीर

खच्चरों और घोड़ों का इस्तेमाल किया गया था शुरू में

कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा, “शुरू में परियोजना टीम द्वारा स्थान तक पहुंचने के लिए खच्चरों और घोड़ों का इस्तेमाल किया गया था. धीरे-धीरे समय के साथ अस्थायी सड़कें बनाई गईं और कार्यस्थल तक पहुंच उपलब्ध कराई गई.” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को प्रतिष्ठित चिनाब पुल, अंजी रेल पुल और उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) परियोजना का उद्घाटन किया. उन्होंने कटरा को श्रीनगर से जोड़ने वाली वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई.

जम्मू: जम्मू और कश्मीर में चेनाब रेल पुल की तस्वीर

11 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया गया सबसे पहले

कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि अंततः नदी तट के उत्तरी किनारे पर 11 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया गया. दक्षिणी किनारे पर 12 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया गया. एफकॉन्स के कार्यकारी उपाध्यक्ष कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन ने कहा कि चिनाब रेलवे ब्रिज महज इंजीनियरिंग का चमत्कार नहीं है. सुब्रमण्यन ने कहा, “यह भारत की सबसे कठिन चुनौतियों पर चतुराई और साहस के साथ विजय पाने के संकल्प का प्रतीक है.”

जम्मू: जम्मू और कश्मीर में चेनाब रेल पुल की तस्वीर

कंपनी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए दुनिया की सबसे ऊंची क्रॉसबार केबल क्रेन और विशेष भारी मशीनरी का उपयोग किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिनाब ब्रिज पर तिरंगा लहराते हुए पैदल मार्च किया, जो सिर्फ उद्घाटन नहीं, बल्कि भारत की इंजीनियरिंग क्षमता का प्रतीक बना. इस मौके पर उन्होंने अंजी रेल ब्रिज, उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक और वंदे भारत ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाई.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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