छात्र वेदांत से मिले राहुल गांधी, वीडियो शेयर कर लिखा-मोदी सरकार से सवाल पूछे, तो मिली बेइज्जती

CBSE : लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार मोदी सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने का आरोप लगा रहे हैं. रविवार को उन्होंने एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने लिखा मेरे साथी एंटी-नेशनल सोरोस एजेंट्स के साथ एक बातचीत.राहुल गांधी ने लिखा वेदांत और उसके दोस्त बहुत होशियार, बहादुर युवा भारतीय हैं जिन्होंने सीबीएसई और मोदी सरकार से आसान सवाल पूछे, लेकिन जवाब के बजाय उन्हें बेइज्जती मिली.

CBSE : सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में गड़बड़ी की शिकायत करके चर्चा में आने वाले दिल्ली के छात्र वेदांत श्रीवास्त ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की. इस मुलाकात और बातचीत का एक वीडियो राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एक्ट पर शेयर किया है. इस वीडियो में राहुल गांधी और छात्र उन आरोपों का मजाक उड़ाते हुए दिख रहे हैं जो उनके ऊपर लगाए गए हैं.

सीबीएसई की गलती सामने आने पर छात्रों को कहा गया डीप स्टेट एजेंट

वीडियो में राहुल गांधी छात्रों से सवाल पूछते हैं कि क्या उन्हें आतंकवादी कहा गया, इसपर वेदांत और उसके साथ मौजूद लड़के यह कहते हैं कि उन्हें डीप स्टेट एजेंट कहा गया, जो देश को अशांत करना चाहते हैं. राहुल गांधी ने इस पर तंज कसते हुए कहा-17 साल के डीप स्टेट एजेंट. इन आतंकवादियों के चेहरे दिखाइए. राहुल गांधी उन छात्रों से पूछते हैं और क्या कहा गया, इसपर छात्र कहते हैं सबकुछ कहा गया, पाकिस्तानी आतंकवादी सोरोस एजेंट.

वेदांत का आरोप उसकी आंसर शीट में किसी और के पेपर जुड़े

वेदांत श्रीवास्त का केस उस समय चर्चा में आया, जब उसने सीबीएसई द्वारा उपलब्ध कराई गई अपनी भौतिकी की उत्तरपुस्तिका के बारे में उसने दावा किया कि यह उसकी राइटिंग से मेल नहीं खाती. उन्होंने कहा था कि उत्तरपुस्तिका में किसी अन्य छात्र की लिखावट दिखाई दे रही है. यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और लाखों लोगों तक पहुंची. विवाद बढ़ने के बाद सीबीएसई ने जांच की और स्वीकार किया कि उत्तरपुस्तिका स्कैनिंग में गड़बड़ी हुई थी. बोर्ड ने सही उत्तरपुस्तिका वेदांत को भेजी और परिणाम में आवश्यक संशोधन करने की बात कही. इस विवाद के बीच सोशल मीडिया पर वेदांत और उनके परिवार को ट्रोल किया गया.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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