BRICS: भारत ने लगातार वैश्विक औसत विकास से बेहतर प्रदर्शन किया

अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व अपर्याप्त है. यह असंतुलन वैश्विक समानता और संतुलित विकास में बाधा उत्पन्न करता है. ब्रिक्स देशों को सामूहिक रूप से ऐसी संस्थाओं में ग्लोबल साउथ की भागीदारी बढ़ाने के लिए ठोस प्रयास करने चाहिए. स्वास्थ्य, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां और भी बढ़ गई हैं. ठोस और समन्वित कार्रवाई के बिना, सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करना कठिन होगा.

BRICS: भारत ऐसी निष्पक्ष और विधिसम्मत वैश्विक व्यापार प्रणाली का समर्थन करता है  जो ग्लोबल साउथ की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को पर्याप्त रूप से मुखरित  करती हो. भारत ब्रिक्स संसदीय मंच को एक महत्वपूर्ण मंच मानता है, जहां हम साझे प्रयासों और परस्पर संवाद के माध्यम से आर्थिक विकास की रूपरेखा को पुनर्परिभाषित कर सकते हैं. यह मंच आपसी सहयोग, एकजुटता और हमारे नागरिकों के कल्याण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है. 

ब्राजील में ब्रिक्स संसदीय मंच की बैठक में ‘आर्थिक विकास के लिए नए रास्तों की तलाश में ब्रिक्स देशों की संसदों की कार्रवाई’ विषय पर आयोजित कार्य सत्र को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने यह बात कही. उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, ब्रिक्स देशों ने आर्थिक विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है. भारत का मानना है कि इसे और मजबूत करने के लिए, हमें ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार, निवेश और वित्तीय सहयोग को बढ़ाना चाहिए.


विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था बनना भारत की ठोस नीतियों का परिणाम 


बिरला ने कहा कि, “पिछले दशक में भारत की आर्थिक प्रगति उल्लेखनीय रही है. विश्वव्यापी अनिश्चितताओं और घरेलू चुनौतियों के बावजूद, भारत ने लगातार वैश्विक औसत विकास से बेहतर कार्य प्रदर्शन किया है. वर्ष 2014 में 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से प्रगति करते हुए आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना भारत की ठोस नीतियों और भारतवासियों के दृढ़ संकल्प का प्रमाण है. 2014-15 से 2024-25 तक, भारत की जीडीपी औसतन 7% से अधिक दर से बढ़ी है, जिससे यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बन गई है. भारत न केवल दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे जीवंत लोकतंत्र है, बल्कि स्थिर शासन, सुदृढ़ संवैधानिक संस्थाओं, विधि के शासन, पारदर्शी और जवाबदेह कर प्रणाली और निर्णायक नेतृत्व वाला देश भी है, जिसमें पूरी दुनिया के निवेशकों ने विश्वास व्यक्त किया है.

भारत की सबसे बड़ी ताकत युवा आबादी


भारत की सबसे बड़ी ताकत इसकी युवा आबादी है, 65 फीसदी से अधिक भारतीय 35 वर्ष से कम आयु के हैं. ये युवा विनिर्माण, डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारत को आगे बढ़ा रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत स्किल इंडिया, पीएम कौशल विकास योजना और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से अपने युवाओं को कौशल प्रदान कर रहा है. ऐसे समय में जब कई विकसित देशों में बढ़ती उम्र वाले लोगों की आबादी अधिक है और श्रम बल की कमी है, भारत दुनिया को कौशल सम्पन्न मानव संसाधन उपलब्ध कराने वाले केन्द्र के रूप में उभर रहा है.  हम न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा कर रहे हैं, बल्कि दुनिया को कुशल मानव संसाधन भी उपलब्ध करा रहे हैं. यह भारत की ताकत है, हमारी जिम्मेदारी है और हमारा योगदान भी है. 

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