12 और 13 सितंबर को भारत की राजधानी नई दिल्ली में 18 वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन होने वाला है. यह चौथी बार है जब भारत इसकी मेजबानी करने जा रहा है. लेकिन आज 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों वाले ब्रिक्स की शुरुआत इतनी बड़ी नहीं थी. 20 साल पहले इसकी कहानी सिर्फ चार देश ब्राजील, रूस, भारत और चीन से शुरू हुई थी.
इस लेख में हम समझेंगे कि कैसे एक अर्थशास्त्री के शोध में इस्तेमाल हुआ शब्द दुनिया के अहम बहुपक्षीय मंचों में से एक बन गया? और यह भी जानेंगे कि भारत के लिए क्यों खास है 2026 का शिखर सम्मेलन?
पहली बार रिसर्च रिपोर्ट में हुआ था ‘BRIC’ शब्द का जिक्र
- ब्रिक्स की कहानी की शुरुआत होती साल 2001 से है.
- उस समय गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने एक शोध रिपोर्ट में ब्राजील, रूस, भारत और चीन को तेजी से उभरती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के तौर पर रेखांकित किया था.
- इन चार देशों के नामों के पहले अक्षर B, R, I, C से BRIC शब्द बना. हालांकि उस समय यह कोई संगठन या औपचारिक देशों का समूह नहीं था.
BRIC में B का मतलब ब्राजील, R का मतलब रूस, I का मतलब भारत और C का मतलब चीन है.
2006 में राजनीतिक मंच के रूप में हुई ‘BRIC’ की शुरुआत
- BRIC को राजनीतिक और कूटनीतिक सहयोग के मंच का रूप देने की दिशा में अहम कदम 2006 में उठाया गया.
- 2006 में हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ब्राजील, रूस, भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई. इसमें BRIC को औपचारिक तौर पर राजनीतिक और कूटनीतिक मंच के तौर मंजूरी मिली.
- इसके बाद इन देशों के बीच नियमित संवाद और सहयोग का सिलसिला आगे बढ़ा. 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में पहला BRIC शिखर सम्मेलन हुआ.
साल 2006 में BRIC स्थापना, उस वक्त उभरती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को आपस में आर्थिक और राजनीतिक रूप से जोड़ने और वैश्विक मंच पर विकासशील देशों की आवाज मजबूत करने के लिए की गई थी.
BRIC से BRICS कैसे हुआ ये समूह
2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में पहले BRIC शिखर सम्मेलन के बाद अगला बड़ा बदलाव 2010-11 में आया. जब चार देशों के इस समूह में दक्षिण अफ्रीका को शामिल करने का फैसला लिया गया.
2011 में सान्या शिखर सम्मेलन में BRIC में दक्षिण अफ्रीका को औपचारिक तौर पर शामिल किया गया और इसके साथ ब्रिक(BRIC), ब्रिक्स(BRICS) बन गया.
दक्षिण अफ्रीका के आने से इस समूह का फोकस सिर्फ आर्थिक संभावनाओं तक सीमित नहीं रहा. वैश्विक शासन व्यवस्था में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका बढ़ाना भी BRICS का एजेंडा हो चुका था.
4 से 11 देशों का समूह कैसे बना BRICS
- BRICS का अगला बड़ा विस्तार 2024 में हुआ, जब मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात नए सदस्य बने. इसके बाद जनवरी 2025 में इंडोनेशिया भी पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल हो गया.
ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया, 11 पूर्ण सदस्य देश हैं.
सिर्फ सदस्य ही नहीं, साझेदार देश भी हैं समूह में शामिल
- 11 पूर्ण सदस्य देश के साथ ब्रिक्स में अब 10 साझेदार देश भी हैं. बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम ब्रिक्स के 10 सहयोगी देश हैं. साझेदार देशों की यह व्यवस्था 2024 के कजान शिखर सम्मेलन में बनाई गई थी.
- पूर्ण सदस्य सभी बैठकों में हिस्सा लेते हैं और फैसले आम सहमति से होते हैं. साझेदार देशों को शिखर सम्मेलन और विदेश मंत्रियों की बैठकों में आमंत्रित किया जा सकता है, लेकिन उनके पास पूर्ण सदस्यों जैसी निर्णयकारी भूमिका नहीं होती.
भारत में कब-कब हुआ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन?
भारत अब तक चार बार ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है.
- 2012 में पहली बार भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में चौथा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ था.
- इसके बाद 2016 में दूसरी बार भारत ने ब्रिक्स की अध्यक्षता की और गोवा में आठवां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन हुआ.
- 2021 में तीसरी बार भारत की अध्यक्षता में 13वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया, लेकिन कोरोना महामारी के कारण यह बैठक वर्चुअल तरीके से हुई थी.
- अब 2026 में चौथी बार भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है. इस दौरान 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा.
भारत के लिए क्यों खास है 2026 का ब्रिक्स?
- भारत ने इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की अध्यक्षता की थी. 2026 में यह भारत की चौथी अध्यक्षता है. इस बार ब्रिक्स ने (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) को थीम बनाया है. यानी मजबूत, नए और टिकाऊ भविष्य के लिए मिलकर काम करना.
- भारत की अध्यक्षता में 18 वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान 25 से ज्यादा शहरों में 350 से अधिक बैठकें और उच्च स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं.
- ब्रिक्स सहयोग के तीन बड़े आधार राजनीतिक एवं सुरक्षा, आर्थिक एवं वित्तीय और सांस्कृतिक एवं जन-जन संपर्क के जरिए समूह को ज्यादा व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया गया है.
- 2001 में एक आर्थिक रिपोर्ट में बने चार अक्षरों का यह शब्द आज 11 देशों के पूर्ण सदस्य समूह और 10 साझेदार देशों वाले बड़े वैश्विक मंच में बदल चुका है. दिल्ली का 18वां शिखर सम्मेलन इसी बदलते ब्रिक्स की दिशा तय करने में अहम पड़ाव होगा.
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