BRICS गाला डिनर में इसलिए परोसा गया वेज खाना, राहुल गांधी के 80% भारतीय नॉन-वेजिटेरियन वाले दावे की क्या है सच्चाई?

BRICS Summit Food Controversy : BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान दिल्ली में आयोजित गाला डिनर का मेन्यू चर्चा का विषय बना हुआ है.जानिए राहुल गांधी द्वारा किया गया, 80% भारतीय नॉन-वेज खाने के दावे की क्या है सच्चाई.

BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान दिल्ली में आयोजित गाला डिनर का मेन्यू अब कूटनीति से ज्यादा राजनीति की वजह से चर्चा में है. BRICS मेहमानों के लिए आयोजित डिनर में पूरी तरह शाकाहारी भारतीय भोजन परोसा गया. जिसको लेकर विपक्ष ने सवाल उठाया कि जब भारत की खान-पान की परंपरा इतनी विविध है, तो इंटरनेशनल मेहमानों के लिए नॉन-वेज विकल्प क्यों नहीं रखा गया?

BRICS गाला डिनर में क्या परोसा गया?

  • 12 सितंबर को BRICS मेहमानों के लिए भारत मंडपम में आयोजित गाला डिनर में मेहमानों को भारतीय राज्यों और अलग-अलग क्षेत्रीय स्वादों से प्रेरित शाकाहारी व्यंजन परोसे गए.
  • स्टार्टर में खांडवी मिलेफॉय और खुंब गलौटी शामिल थे. खुंब गलौटी मूल गलौटी कबाब की शाकाहारी शैली है, जिसमें मशरूम का इस्तेमाल किया गया था.
  • मेन कोर्स में पनीर लबाबदार, गुच्छी मार्मिक, कैरट-बीन्स पोरियाल, थकाली बेले सारू, मिलेट पुलाव और चुकंदर रायता जैसे व्यंजन थे.
  • डेजर्ट में पुरानी दिल्ली की फ्रूट क्रीम विद जलेबी और शहतूत फिरनी परोसी गई. मेन्यू सिर्फ एक-दो शाकाहारी व्यंजनों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें उत्तर, पश्चिम, दक्षिण और हिमालयी स्वादों को शामिल करने की कोशिश की गई थी.

राहुल गांधी के 80 प्रतिशत वाले दावे की सच्चाई क्या है?

BRICS मेहमानों के लिए आयोजित डिनर में पूरी तरह शाकाहारी भारतीय भोजन होने को लेकर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया. जिसमें राहुल गांधी ने दावा किया कि 80 प्रतिशत भारतीय नॉन-वेजिटेरियन हैं.

  • 80 प्रतिशत भारतीय नॉन-वेजिटेरियन वाले दावे को लेकर उपलब्ध सरकारी सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि भारत में नॉन-वेज खाने वालों की संख्या निश्चित रूप से बड़ी है, लेकिन पूरे भारत की आबादी का ठीक 80 प्रतिशत कहना आंकड़ों की सही व्याख्या नहीं है.
  • एनएफएचएस-5, यानी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2019-21 के मुताबिक, 15 से 49 साल की उम्र के 83.4 प्रतिशत पुरुष और 70.6 प्रतिशत महिलाएं रोजाना, साप्ताहिक या कभी-कभार मछली, चिकन या मांस खाती थीं.
  • इसलिए 80 प्रतिशत का आंकड़ा एक मोटा अनुमान कहा जा सकता है, लेकिन इसे पूरे भारतीय समाज का सटीक और आधिकारिक प्रतिशत बताना सही नहीं होगा.

गाला डिनर में वेज मेन्यू को लेकर क्यों हो रहा विवाद ?

  • विपक्ष का तर्क यह है कि भारत की खाद्य संस्कृति में शाकाहारी और मांसाहारी, दोनों तरह के व्यंजन मौजूद हैं.
  • कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और महुआ मोइत्रा समेत विपक्षी नेताओं ने इसी विविधता का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि विदेशी मेहमानों के लिए दोनों विकल्प क्यों नहीं रखे गए.
  • हालांकि, किसी आधिकारिक डिनर में सिर्फ शाकाहारी मेन्यू रखना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि सरकार भारतीय खान-पान की विविधता को छुपाना चाहती थी.
  • दरअसल, मेन्यू का चयन मेजबान देश की ओर से तय किया जाता है और उसमें सांस्कृतिक प्रस्तुति, आयोजन की थीम, सुरक्षा, प्रोटोकॉल और मेहमानों की जरूरत जैसे कई पहलू शामिल होते हैं.

कांग्रेस के आरोप पर सरकार ने क्या जवाब दिया?

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर डिनर के खाने को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा कि विदेशी मेहमानों ने भारतीय शाकाहारी भोजन का आनंद लिया और मेन्यू में देश के अलग-अलग राज्यों की समृद्ध परंपराओं को दिखाया गया.

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By गौतम कुमार

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