बंबई हाईकोर्ट ने कहा- शेयर ऑटो में बैडटच को कार्यस्थल में उत्पीड़न नहीं माना जा सकता

Bombay High Court:बॉम्बे हाईकोर्ट ने साझा ऑटो 24 मार्च 2023 के मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. जिसमें एक महिला कर्मचारी ने पुरूष कर्मचारी पर शेयर ऑटों में बैड टच का आरोप लगाया गया था. बॉम्बे हाई कोर्ट की ओर से इस मामले को PoSH कानून के दायरे से बाहर करार दिया गया है और SBI के पुरूष कर्मचारी को राहत दी है.

Bombay High Court: बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि नौकरी पर आने-जाने के लिए इस्तेमाल किया गया साझा ऑटो-रिक्शा, PoSH (कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न रोकथाम) कानून के तहत कार्यस्थल नहीं माना जा सकता, जब तक कि वह वाहन नियोक्ता (employer) द्वारा उपलब्ध न कराया गया हो.

साझा ऑटो में हुआ था विवाद

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) का एक कर्मचारी 24 मार्च 2023 को साझा ऑटो-रिक्शा से अपने कार्यालय जा रहा था. उसी ऑटो में एक महिला कर्मचारी भी सफर कर रही थीं. यात्रा के दौरान दोनों के बीच कथित शारीरिक संपर्क को लेकर विवाद हो गया. जिसके के बाद यह मामला कोर्ट पहुंचा.

महिला ने पुरूष पर उत्पीड़न का आरोप लगाया

महिला कर्मचारी ने पुरुष कर्मचारी पर जानबूझकर अनुचित शारीरिक संपर्क का आरोप लगाया था. इसके बाद दोनों के बीच बहस हुई और महिला ने कथित तौर पर पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया और पुलिस को बुला लिया. इसके बाद यह मामला तूल पकड़ता गया.

ICC ने कर्मचारी को ठहराया था दोषी

इस घटना के बाद बैंक की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) ने मामले की जांच की और पुरुष कर्मचारी को यौन उत्पीड़न का दोषी ठहराया गया. समिति की रिपोर्ट के आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई की गई.

हाईकोर्ट ने पलटा ICC का फैसला


पुरूष कर्मचारी ने ICC के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी. सुनवाई के बाद अदालत ने कहा कि साझा ऑटो-रिक्शा को कार्यस्थल नहीं माना जा सकता क्योंकि यह बैंक द्वारा उपलब्ध कराया गया परिवहन नहीं था. इसलिए PoSH कानून की कार्यस्थल संबंधी परिभाषा इस मामले में लागू नहीं होती.

हाई कोर्ट के फैसले का होगा दूरगामी असर


अदालत की ओर से ICC की रिपोर्ट और उसके निष्कर्षों को रद्द कर दिया गया है. कार्ट ने कहा है कि शेयर ऑटो का यह मामला PoSH कानून के दायरे नहीं आता है. इसलिए “कार्यस्थल” की परिभाषा को लेकर भविष्य के मामलों में बाम्बे हाई कोर्ट का यह फैसला एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है.


क्या है PoSH कानून, किन -किन लोगों पर यह लागू होता है


पॉश (PoSH) कानून के तहत देश भर में महिलाओं की कार्यस्थल पर सुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कानून है. यह कानून कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (Sexual Harassment of Women at Workplace Act, 2013) में बनाया गया. इसके तहत महिलाओं को कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार के यौन उत्पीड़न से बचाना और एक सुरक्षित, सम्मानजनक काम का माहौल प्रदान करना है . यह कानून भारत के सभी सरकारी कार्यालयों, निजी कंपनियों, फैक्टरियों, अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं (स्थायी, अस्थायी, इंटर्न या घरेलू कामगार) पर लागू होता है. जिन संस्थानों में 10 या उससे अधिक कर्मचारी हैं, वहां एक ‘आंतरिक शिकायत समिति’ का गठन करना अनिवार्य है, जो यौन उत्पीड़न की शिकायतों की जांच करती है. इसमें घटना के 3 महीने के भीतर लिखित शिकायत दर्ज करानी होती है.

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By Satyendra Giri

सत्येन्द्र गिरि प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वे मुख्य रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़ी खबरों का लेखन करते हैं. सरल, तथ्यात्मक और पाठक-केंद्रित लेखन उनकी प्रमुख पहचान है. उन्होंने एशिया के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से मास्टर ऑफ आर्ट्स इन मास कम्युनिकेशन (बैच 2023–25) की डिग्री प्राप्त की है.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, रिपोर्टिंग और समसामयिक विषयों की गहन समझ विकसित की. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके पास एक वर्ष का पेशेवर अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला के गोरखपुर एडिशन से की, जहां समाचार लेखन और रिपोर्टिंग की बारीकियों को नजदीक से सीखने और समझने का अवसर मिला. इसके बाद उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में कदम रखते हुए प्रभात खबर डिजिटल से जुड़कर देश-विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य शुरू किया.

सत्येन्द्र की विशेष रुचि इतिहास, अंतरराष्ट्रीय संबंध, राजनीति, कूटनीति और समसामयिक घटनाक्रम से जुड़े विषयों में है. वे जटिल और गंभीर मुद्दों को भी सरल, संतुलित और विश्वसनीय तरीके से प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं. राष्ट्रीय और वैश्विक घटनाओं पर उनकी गहरी नजर रहती है तथा वे तथ्यपरक और निष्पक्ष पत्रकारिता को अपनी कार्यशैली का आधार मानते हैं. वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के निवासी हैं.

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