BJP: केजरीवाल सियासी लाभ के लिए बच्चों का कर रहे हैं इस्तेमाल

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने सोशल मीडिया से कुछ बच्चों को केजरीवाल के समर्थन में नारे लगाते हुए दिखाने वाला पोस्ट नहीं हटाया है. जबकि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले पर गंभीर चिंता जाहिर कर चुका है. बच्चों का ऐसा चित्रण किशोर अधिनियम और निर्वाचन आयोग के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है.

BJP: दिल्ली में भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच सियासी घमासान तेज होता जा रहा है. मंगलवार को भाजपा ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर राजनीतिक लाभ लेने के लिए बच्चों का इस्तेमाल करने को ओछी और घटिया राजनीति करार दिया. भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने सोशल मीडिया से कुछ बच्चों को केजरीवाल के समर्थन में नारे लगाते हुए दिखाने वाला पोस्ट अभी तक नहीं हटाया है. जबकि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले पर गंभीर चिंता जाहिर कर चुका है. बच्चों का ऐसा चित्रण किशोर अधिनियम और निर्वाचन आयोग के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है.

उन्होंने ने कहा कि ‘केजरीवाल और मुख्यमंत्री आतिशी सियासी लाभ के लिए बच्चों को भी नहीं छोड़ रहे हैं. आप ऐसा इसलिए कर रही क्योंकि उसे पता है कि वह दिल्ली विधानसभा का चुनाव हार रहे हैं. भाजपा यह सुनिश्चित करेगी कि बच्चों के साथ खिलवाड़ करने वाले और उनका जीवन बर्बाद करने वाले केजरीवाल की हार हो. दिल्ली सरकार शौचालयों को क्लासरूम में बदल रही है. यही नहीं जानबूझकर 9वीं और 11वीं के बच्चों को फेल किया जा रहा है ताकि 10वीं और 12वीं के पास होने का प्रतिशत अधिक आ सके. चुनाव में केजरीवाल को सबक सिखा कर दिल्ली के लोग हैप्पीनेस उत्सव मनाएंगे. 

सिर्फ झूठे वादे कर रहे हैं केजरीवाल

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि केजरीवाल ने दिल्ली में 500 नए स्कूल खोलने का वादा किया था, लेकिन 10 साल सरकार में रहने के बाद भी एक नया स्कूल नहीं खोला गया. दिल्ली के स्कूलों में लगभग 80 फीसदी शिक्षकों के पद रिक्त हैं. अब चुनाव से पहले केजरीवाल पुजारियों और ग्रंथियों को हर महीने 18 हजार रुपये देने का झूठा वादा कर रहे हैं. कुछ महीने  पहले तक दिल्ली सरकार धार्मिक स्थलों के बाहर शराब की दुकानें खोल रही थी. चुनाव आते ही केजरीवाल को पुजारियों और ग्रंथियों की याद आने लगी. आप सरकार ने भी इमामों को इतनी ही राशि देने का वादा किया था, लेकिन 17 महीने से उन्हें भुगतान नहीं किया गया है और इमाम केजरीवाल के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं.

वहीं कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने भर केजरीवाल के चुनाव से पहले किए जाने वाले वादों की आलोचना करते हुए कहा कि पिछले 10 साल से सरकार में रहने के दौरान इन वादों को क्यों नहीं लागू किया गया. चुनाव आते ही केजरीवाल को महिला, बुर्जुगों, पुजारियों और ग्रंथियों की याद आने लगी. केजरीवाल को यह बताना चाहिए कि अगर वे मुख्यमंत्री बन जाते हैं तो इन घोषणाओं को कैसे लागू करेंगे. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार केजरीवाल मुख्यमंत्री के तौर पर कोई फाइल साइन नहीं कर सकते हैं. सिर्फ लोगों को गुमराह करने के लिए झूठे वादे किए जा रहे हैं.  

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Author: Vinay Tiwari

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