मध्य प्रदेश चुनाव में हार को भांप कर बीजेपी नेता थाम रहे हैं कांग्रेस का 'हाथ', दिग्विजय सिंह ने किया ये दावा

कांग्रेस नेता अदालत में लंबित मानहानि के एक मामले के सिलसिले में ग्वालियर में थे. यहां उन्होंने मीडिया से बात की और बीजेपी पर जमकर हमला किया. उन्होंने कहा कि हार को भांप कर बीजेपी नेता कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं.

मध्य प्रदेश में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इससे पहले कांग्रेस और बीजेपी के बीच जुबानी जंग तेज हो चली है. ताजा बयान कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह का सामने आया है. उन्होंने दावा किया है कि मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कई नेता कांग्रेस में शामिल होने के इच्छुक हैं क्योंकि उन्हें प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में ‘हार’ का अहसास हो गया है. दिग्विजय सिंह ने मीडिया से बात करते हुए उक्त बातें कही. कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विश्वास है कि वह पिछले 18 वर्षों से मध्य प्रदेश में सत्ता में रही बीजेपी सरकार और उसके मंत्रियों के पाप धो सकते हैं? उन्होंने दावा किया कि लोगों ने मध्य प्रदेश में बीजेपी को सत्ता से हटाने का मन बना लिया है. यह महसूस करते हुए कि उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ेगा, सत्तारूढ़ दल के कई बड़े नेता कांग्रेस में शामिल होने का लगातार प्रयास कर रहे हैं.

आपको बता दें कि कांग्रेस नेता अदालत में लंबित मानहानि के एक मामले के सिलसिले में ग्वालियर में थे. सिंह ने दावा किया कि उनके बयानों को गलत तरीके से पेश करने का काम किया गया और कई जगहों पर उनके खिलाफ मामले दर्ज किये गये, लेकिन अब तक उन्हें कभी दोषी नहीं ठहराया गया. इस बीच आपको बता दें कि विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का कुनबा कम होता नजर आ रहा है. दरअसल, सिंधिया के वफादार एक और प्रभावशाली नेता प्रमोद टंडन शनिवार को कांग्रेस में फिर से शामिल हो गए. इससे चुनावी राज्य मध्य प्रदेश में ऐसे नेताओं की संख्या छह हो चुकी है.

अब तक सिंधिया के छह वफादारों ने छोड़ी बीजेपी

इंदौर निवासी टंडन भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य थे और उन्होंने पिछले दिनों ही बीजेपी छोड़ दी थी. टंडन और बीजेपी से नाता तोड़ चुके दो अन्य स्थानीय नेताओं-रामकिशोर शुक्ला और दिनेश मल्हार को इंदौर में शनिवार को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ की मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पार्टी में विधिवत शामिल किया गया. बीजेपी से मोहभंग होने पर कांग्रेस में लौटने वाले टंडन, ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके दिवंगत पिता माधवराव सिंधिया के वफादार समर्थकों में गिने जाते रहे हैं. गौर हो कि उनकी गिनती उन नेताओं में थी जो वर्ष 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया की सरपरस्ती में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे. बीजेपी कार्यसमिति के सदस्य समंदर पटेल (52) के 18 अगस्त को भोपाल में सैकड़ों समर्थकों के साथ फिर से कांग्रेस में शामिल होने के बाद टंडन कांग्रेस में लौटने वाले सिंधिया के छठे वफादार हैं.

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समंदर पटेल ने क्या कहा

समंदर पटेल ने जानकारी दी कि टंडन सिंधिया खेमे से कांग्रेस में दोबारा शामिल होने वाले छठे नेता हैं. पटेल से पहले, मध्य प्रदेश बीजेपी कार्यसमिति के सदस्य बैजनाथ सिंह यादव अपने समर्थकों के साथ जुलाई में कांग्रेस पार्टी में फिर से शामिल हो गए थे. यादव 2020 से पहले कांग्रेस के शिवपुरी जिला अध्यक्ष रह चुके हैं. पटेल ने कांग्रेस में लौटने के एक दिन बाद कहा कि बीजेपी ने न तो मुझे और न ही मेरे समर्थकों को स्वीकार किया. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के नेताओं ने मुझे किसी भी समारोह में आमंत्रित नहीं किया, जबकि मैं बीजेपी कार्य समिति का सदस्य था. इसके बजाय मेरे समर्थकों को झूठे मामलों में फंसाया गया और आर्थिक रूप से कमजोर किया गया.

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पिछले विधानसभा चुनाव का परिणाम

उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में 2018 के विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था, लेकिन कांग्रेस ने कमलनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में सरकार बनाई थी. इस चुनाव में कांग्रेस ने 114 सीटें हासिल की थी और सपा, बसपा और स्वतंत्र विधायकों के समर्थन से कमलनाथ के नेतृत्व में गठबंधन सरकार बनाई. हालांकि, मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में उनके समर्थक विधायकों के कांग्रेस से विद्रोह के कारण कमलनाथ सरकार गिर गई. इसके बाद प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक बार फिर बीजेपी ने सरकार बना ली.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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